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वाराणसी : आठ साल के बच्चे की बेरहमी से हत्या, रस्सी से गला कस दिया वारदात को अंजाम

Thu, 11 Jul 2019 12:22 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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मौके पर जांच पड़ताल करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के सारनाथ में एक आठ साल के बच्चे की गला दबा कर हत्या का मामला सामने आया है। सूचना पर पहुंची पुलिस सीसी कैमरों के आधार पर जांच पड़ताल कर रही है। पुलिस के मुताबिक बच्चे की हत्या रस्सी से गला कस कर की गई है।

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बिहार के बेगूसराय की रहने वाली पिंकी सत्संग नगर कॉलोनी में किराये के मकान में रहती है। पिंकी दो बेटियों खुशी व अनन्या और उनसे छोटे बेटे शुभम के साथ रह कर चौका बर्तन का काम करती है। शुभम कक्षा एक में पढ़ता था। पिंकी का पति डबलू पांच साल से उससे अलग होकर भागलपुर में रहता है।

पिंकी के अनुसार वह शाम चार बजे के घर से अपने काम पर गई थी। उसकी दोनों बेटियां और शुभम सो रहे थे। देर शाम दोनों बेटियों की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि शुभम घर में नहीं है तो वह बाहर आईं। बाहर आकर दोनों ने देखा कि शुभम घर के बाहर स्थित गार्डेन में लेटा हुआ था तो उन्होंने उसके चेहरे पर पानी डाला, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हुई।
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इस पर दोनों शोर मचाते हुए मां को सूचना देने गईं। शुभम को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया। घटनास्थल के समीप ही लगभग एक मीटर लंबी नारियल की रस्सी पड़ी मिली है। शुभम की मां का किसी से विवाद नहीं है।

शुभम की मां, दोनों बहनों और पड़ोसियों से पूछताछ करने के साथ ही क्षेत्र में लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाल कर पुलिस वारदात की तह तक जाने के प्रयास में जुटी है। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि बच्चे की मां से किसी की रंजिश जैसी कोई बात फिलहाल सामने नहीं आई है। वारदात की क्या वजह है और किसने हत्या की, इसकी पड़ताल कर जल्द ही खुलासा किया जाएगा।

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बेटा ही तो जीने का सहारा था, अब किसके सहारे जियेंगे

शुभम (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
शुभम को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाते ही पिंकी अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ी। पड़ोसियों ने पानी छिड़का तो वह बेटे के शव से लिपट कर बिलखने लगी। पिंकी का कहना था कि पति ने पहले ही नाता तोड़ लिया है। बेटा ही जीने का सहारा था।

दूसरों के घर में चौका बर्तन कर उसे पढ़ालिखा रही थी। अब किसके सहारे यह जीवन कटेगा। पिंकी का बिलखना देख उसे ढांढस बंधाने आई मुहल्ले की महिलाओं की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी।
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