सुरेश ने पूछताछ में बताया कि उसका पट्टीदार रामाशीष मिश्रा से जमीन संबंधी विवाद चल रहा था। 12 फरवरी 2001 को बांस काटने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ। उसी दौरान उसने रामाशीष के पक्ष से आए विनोद मिश्रा की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इस संबंध में बस्ती जिले के हरैया थाने में सुरेश मिश्रा और उसके भाई रामसागर मिश्रा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। उसे स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और अदालत ने सजा सुनाई थी।
सुरेश ने बताया कि मंडलीय अस्पताल से फरार होने के बाद वह दिल्ली चला गया था। वहां लाल बहादुर राम के नाम से वह रहने लगा और राजगीर का काम करता था। इसके बाद वह शहर बदलता चला गया और लाल बहादुर के नाम से ही राजगीर का काम करता रहा। डेढ़ दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद वह आश्वस्त हो गया था कि पुलिस न अब उसे पहचान पाएगी और न पकड़ पाएगी।