अभियोजन के अनुसार, मझवारा निवासी शब्बीर अहमद की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। वादी का कथन है कि 20 दिसंबर 2013 को उसके भाई फिरोज अहमद की मुर्गे और दाना के पैसे के विवाद को लेकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने मामले की विवेचना कर सरायलखंसी थाना क्षेत्र के ठकुरमनपुर निवासी प्रदीप चौहान, रानीपुर थाना क्षेत्र के अरैला निवासी धनेश उर्फ मैनू यादव, दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के भटकुंआ पट्टी निवासी राजेश यादव, मनीष पांडेय और सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बरलाई निवासी पिंटू यादव के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने सात गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी राजेश यादव और मनीष पांडेय को संदेह का लाभ देते हुए आरोपमुक्त कर दिया।
वहीं, पिंटू यादव की विचारण के दौरान मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। आरोपी प्रदीप चौहान और धनेश उर्फ मैनू यादव को हत्या के मामले में दोषी पाया गया। दोनों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। वहीं, घातक हथियार से लैस होकर बलवा करने के मामले में दोनों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।