बनारस की सड़कों और गलियों में चलना मुश्किल
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शासन के निर्देश पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कूड़ा प्रबंधन से लेकर उठाने और निस्तारण के लिए नए सिरे से कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। सूखा और गीला कूड़ा उठाने, निस्तारण, नागरिकों को जागरूक करने और बेहतर तरीके से काम होगा। ताकि शहर को कचरा मुक्त बनाया जा सके। अभी कूड़ा उठान से लेकर निस्तारण के लिए नगर निगम के अलावा एक एजेंसी को भी हायर किया गया है। जो नगरीय इलाके में कूड़ा उठा रही है।
अभी ये है सफाई की व्यवस्था एवं संसाधन :
- शहर से रोजाना निकलने वाला कूड़ा : 600 से 650 एमटी
- नगर के 90 वार्डों में कार्यरत सफाई कर्मी : 4200
- सफाई एजेंसी एक : वेस्ट सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
- छोटे-बड़े वाहनों, कूड़ा ट्राली की संख्या : 200 से अधिक
- पांच जोन में बंटा है शहर : वरुणापार, दशाश्वमेध, भेलूपुर, आदमपुर और कोतवाली
- नगर निगम में शामिल 84 गांवों में वर्तमान में 600 सफाई कर्मी हैं तैनात
मौसम में बदलाव और बारिश के बाद शहर की सड़कों और गलियों में चलना मुश्किल हो गया है। कीचड़ और कचरे के बीच लोग जैसे-तैसे आवागमन कर रहे हैं। दो दिन की बारिश में कूड़ा घरों के बाहर जमा कूड़े से बदबू आने लगी है। नगर निगम प्रशासन कूड़ा उठाने से लेेकर शहर की नियमित सफाई का दावा तो कर रहा है मगर उसके बाद भी जहां-तहां कचरा फैला हुआ है।
नगरीय सीमा से रोजाना तकरीबन 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके निस्तारण और सफाई के लिए 4200 सफाई कर्मियों को लगाया गया है। इसके अलावा निगरानी के लिए जोनल अधिकारी से लेकर सफाई सुपरवाइजरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
सोनिया, मलदहिया, इंग्लिशिया लाइन, शिवाला में बने कूड़ा घरों के बाहर कचरा फैलने और बारिश से गंदे पानी के रिसाव के चलते राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ी। निचले इलाकों में जगह-जगह जलभराव से भी नागरिकों को दिक्कत हुई। रानीपुर, बजरडीहा, सुंदरपुर, नेवादा, जलालीपुरा जैसे इलाकों में पानी लगने और कीचड़ से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि शहर को कूड़ा-कचरा मुक्त बनाए जाने के लिए नए सिरे से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ताकि शहर के सभी कॉलोनियों और मुहल्लों में और बेहतर सफाई व्यवस्था के इंतजाम हो सकें।