इस कार्रवाई से नगर निगम के लिपिकों, कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं नगर आयुक्त ने मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर साल 2018 से पहले के भी नोशन लॉस की जांच कराने के लिए शासन स्तर कमेटी से जांच की मांग की है। साथ ही जांच से जुड़ी फाइलों में से सिर्फ 315 फाइलों की ही जांच हो पाई है, जिनमें 158 फाइलें मिसिंग है। इस संबंध में दोनों संबधित लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है।
इस मामले में बात करते हुए नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया कि विगत दो महीनों से दो जांच समितियों द्वारा साल 2018-19 में परिवहन विभाग वाराणसी नगर निगम में अनियमितताएं विभिन्न माध्यमों से परिलक्षित हुई थीं, उसकी जांच हो रही थी। ये जांच मीडिया, शासन और लोकल सूत्रके माध्यम से की जा रही थी। जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार फाइनल होकर मेरे पास आई। इसमें 2018-19 में क्रय और मरम्मत हुई कामों में अनियमितताएं पाई गईं।
नगर आयुक्त ने बताया कि उसमें लगभग 22 लाख 85 हजार का डायरेक्ट लॉस और हमारा 60 से 70 लाख का नोशन लॉस भी वाराणसी नगर निगम को हुआ है। नगर आयुक्त ने बताया कि इस प्रकरण में शामिल पांच संबधित लिपिक और दो पंप लिपिक, एक जूनियर फिटर, एक स्पेयर्स पार्ट्स कीपर और एक जेई परिवहन को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अलावा एक्सईएन परिवहन के खिलाफ शासन को एक पत्र दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति के लिए लिखा गया है।
नगर आयुक्त ने इस मामले में सख्ती बरतते हुए दस कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि दस कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करते हुए चार कंपनियों के खिलाफ एफआईआर के लिए अपर नगर आयुक्त प्रथम को निर्देशि दिया गया है। इन चार कंपनियों का लेटर पैड, एड्रेस, मोबाइल नंबर यहां तक कि टर्न ओवर भी एक जैसा था। जांच के बाद ये तथ्य सामने आने पर इन कंपनियों पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।