Varanasi News: मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉल में संचालित होने वाली कैंटीन और फास्ट फूड की दुकानें बंद हो गईं। भीड़ कम होने के कारण ये कैंटीन बंद हो चुकी हैं। जब बड़ी फिल्में रिलीज होती हैं तो अस्थायी तौर पर पॉपकॉर्न, स्वीटकॉर्न व कोल्ड ड्रिंक के स्टॉल लगाए जाते हैं।
कोविड के तीन साल बाद भी सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स उबर नहीं पाए। अधिकतर सीटें खाली रहती हैं। कभी-कभी स्थिति यह होती है कि बोहनी तक नहीं हो पाती। कोविड से पहले मल्टीप्लेक्स में ऑडी वन और टू का सिर्फ एक शो चलता था।
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लगभग पांच लाख रुपये की कमाई होती थी, अब 20 से 25 हजार रुपये निकालना भी मुश्किल हो गया है। अधिकतर मल्टीप्लेक्स के ऑडी महीने के 15 दिन बंद ही रहती है। बड़े बैनर की फिल्मों की रिलीज में देरी और छोटे बैनर की फिल्में ज्यादा दिन तक चल नहीं पाती है।
भेलूपुर स्थित आईपी विजया मल्टीप्लेक्स मैनेजर कृष्णा नंद पांडेय ने बताया कि कोविड से पहले दोनों ऑडी फुल रहती थी। अब कभी-कभी ऐसी स्थिति हो पाती है, जब बड़े बैनर की फिल्में पर्दे पर आती हैं। हालांकि, अब ओटीटी प्लेटफॉर्म के बाद से मल्टीप्लेक्स सूने हो गए हैं।
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आईपी मुगल के मल्टीप्लेक्स प्रबंधक विशाल तिवारी ने बताया कि कोविड के बाद कभी-कभी बोहनी का इंतजार करना पड़ता है। मल्टीप्लेक्स के मानक के हिसाब से कम से कम 15 दर्शकों के ऑडी में होने के बाद ही शो चालू कर सकते हैं।
छावनी क्षेत्र स्थित जेएचवी मल्टीप्लेक्स के प्रबंधक मनीष गुप्ता ने बताया कि तीन ऑडी में 15 शो रोज चलते हैं। लोकसभा चुनाव के बाद कई रोमांचक फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इससे कुछ उम्मीद की जा सकती है।
हफ्ते में 10 शो, सिर्फ बरेका कर्मियों और परिजनों के लिए
बनारस रेल इंजन कारखाना में 1959 से सिनेमा हॉल संचालित हो रहा है। इस सिनेमा हॉल में सिर्फ बरेका कर्मियों, परिजनों और आश्रितों को प्रवेश मिलता है। 650 सीट की क्षमता वाले सिनेमा हॉल में 10 शो चलते हैं। पीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि 15 से 20 रुपये प्रति दर्शक टिकट है। नई फिल्में रिलीज होने के 8 से 10 दिन बाद यहां लगती हैं। कोविड के बाद से दर्शकों में कमी आई है।