यूपी में चाचा-भतीजा में दंगल पार्ट-II
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समाजवादी पार्टी में शीर्ष स्तर पर मचे घमासान के बीच बुधवार को जारी की गई सूची में शहर उत्तरी से घोषित प्रत्याशी अब्दुल समद अंसारी का टिकट काटकर ओपी सिंह को दे दिया गया है। अब्दुल समद को लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल का करीबी बताया जाता है।
जबकि, नए प्रत्याशी ओपी सिंह को पार्टी के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश सिंह की पैरवी पर टिकट मिलने की चर्चा है। हालांकि ओपी सिंह खुद को टीम अखिलेश का सदस्य बताते हैं लेकिन इस फेरबदल से स्थानीय स्तर पर भी सपा में नए समीकरणाें का उभार तय माना जा रहा है।
अब्दुल समद अंसारी पूर्व में सपा से विधायक रह चुके हैं। वह पिछली बार चुनाव हार गए थे। इस बार उन्हें फिर प्रत्याशी बनाया गया था। सूत्रों की मानें तो उनसे यादव बिरादरी के लोग नाराज थे। इसकी शिकायत ऊपर तक हुई थी।
बुधवार को लखनऊ में सपा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पूर्व महानगर अध्यक्ष ओपी सिंह को बधाई देने वालों का तांता लग गया। कई लोग जो अब तक समद के साथ घूमते थे, वे ओपी सिंह के साथ हो लिए।
वहीं बुधवार को जारी सूची में शहर दक्षिणी सीट का जिक्र न होने से अटकलों का बाजार गर्म है। सपा से अशफाक अहमद डब्लू को प्रत्याशी घोषित हैं लेकिन चर्चा है कि इस सीट से मुख्तार अंसारी के बेटे या फिर अतहर जमाल लारी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।
अतहर जमाल लारी पिछले चुनाव में कौमी एकता दल से दक्षिणी से चुनाव लड़े थे। उन्हें सपा प्रत्याशी से ज्यादा वोट मिले थे। अब कौमी एकता दल का सपा में विलय हो चुका है।