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मुख्तार अंसारी दोषी या निर्दोष: अवधेश राय हत्याकांड में फैसला आज, 32 साल पहले दिनदहाड़े छलनी कर दिए गए थे

Mon, 05 Jun 2023 09:29 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) अवनीश गौतम की अदालत 32 वर्ष पुराने अवधेश राय की हत्या के मामले में आज फैसला सुना सकती है। हत्यारोपी माफिया मुख्तार अंसारी है। वह बांदा जेल में बंद है।
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माफिया मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बांदा जेल में बंद बाहुबली पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के लिए आज का दिन बेहद अहम होगा। वाराणसी के बहुचर्चित 32 वर्ष पुराने अवधेश राय हत्याकांड का फैसला होना है। पूर्वांचल में सभी की निगाहें सोमवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) अवनीश गौतम के फैसले पर टिकी है। मामले में मुख्य आरोपी माफिया मुख्तार अंसारी है। उसकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी भी हो सकती है।

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अवधेश राय हत्याकांड में अदालत मुख्तार को दोषी पति है या बरी करती है यह सोमवार को तय होगा। बीते एक साल में मुख्तार अंसारी को चार मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन इन सभी मामलों में अवधेश राय हत्याकांड का मामला सबसे बड़ा और सबसे बड़ी सजा के प्रावधान का है, जिसमें मुख्तार अंसारी समेत नामजद चार आरोपियों की किस्मत का फैसला होगा।

कचहरी परिसर में सुरक्षा रहेगी सख्त

लोग जानना चाहेंगे कि मुख्तार को कैसी सजा मिलती है या वह बरी हो जाता है। फैसले के मद्देनजर सिविल कोर्ट परिसर के साथ ही नौ मंजिला बिल्डिंग स्थित अदालत कक्ष की सुरक्षा का खाका खींचा गया है। सिविल कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर पुलिस और खुफिया विभाग के लोगों की नजर रहेगी। हालांकि, सिविल कोर्ट में ग्रीष्मावकाश के कारण आम दिनों की अपेक्षा चहल-पहल कम रहेगी।
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वैन से आए बदमाशों ने की थी अंधाधुंध फायरिंग

अवधेश राय पूर्व मंत्री व पिंडरा के कई बार विधायक रहे और अब कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई हैं। तीन अगस्त 1991 को वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र के लहुराबीर इलाके में रहने वाले कांग्रेस नेता अवधेश राय अपने भाई अजय राय के साथ घर के बाहर खड़े थे। सुबह का वक्त था। एक वैन से आए बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।

अवधेश राय को गोलियों से छलनी कर दिया गया। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। घटना से पूरा पूर्वांचल सहम उठा था। पूर्व विधायक अजय राय ने इस मामले में मुख्तार अंसारी को मुख्य आरोपी बनाया। साथ में भीम सिंह, कमलेश सिंह व पूर्व विधायक अब्दुल कलाम  और राकेश न्यायिक का भी नाम रहा। इनमें से कमलेश व अब्दुल कलाम की मौत हो चुकी है। 

कोर्ट दर कोर्ट घूमता रहा प्रकरण

इस प्रकरण की सुनवाई पहले बनारस की ही एडीजे कोर्ट में चल रही थी लेकिन 23 नवंबर 2007 को सुनवाई के दौरान ही अदालत के चंद कदम दूर ही बम ब्लास्ट हो गया। एक आरोपी राकेश न्यायिक ने सुरक्षा को खतरा बताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली और काफी दिनों तक सुनवाई पर रोक लगी रही। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट के गठन होने पर इलाहाबाद में सुनवाई शुरू हुई। फिर बनारस में एमपी/एमएलए की विशेष कोर्ट के गठन होने पर सिर्फ मुख्तार अंसारी के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई जबकि राकेश न्यायिक की पत्रावली अभी भी वहीं पर लंबित है।
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फोटोस्टेट पत्रावली के आधार पर सुनवाई का पहला मामला

हत्या जैसे मामले में फोटोस्टेट पत्रावली के आधार पर सुनवाई का संभवत: यह पहला प्रकरण है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट तक गया। लेकिन, लंबी कानूनी प्रक्रिया के तहत यहीं की अदालत में सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने पांच जून को फैसले के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है।
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अजय राय बोले- तीन दशक से जारी है संघर्ष, न्याय की उम्मीद

कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा कि बड़े भाई की हत्या करने वाले अपराधियों के खिलाफ तीन दशक से ज्यादा समय से संघर्ष कर रहा हूं। माफिया के धनबल, बाहुबल और सत्ता से गठजोड़ के आगे कभी नहीं झुका। न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है। बड़े भाई की नृशंस तरीके से हत्या करने वाले को अदालत कठोरतम सजा से दंडित करेगी। इसका भरोसा है।
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