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Mukhtar Ansari: तीन राज्य, 65 मुकदमे और दो बार मिली उम्रकैद की सजा, कहानी 18 साल से जेल में बंद मुख्तार की...

Thu, 14 Mar 2024 11:42 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Mukhtar Ansari : गाजीपुर के फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में मुख्तार अंसारी को आजीवन कारावास के साथ ही एमपी/एमएलए कोर्ट की अदालत ने 2.02 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 18 वर्षों से मुख्तार जेल में है। उस पर यूपी, दिल्ली और पंजाब में 65 मुकदमे दर्ज हैं। 
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Mukhtar Ansari - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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जिले की एमपी/एमएलए कोर्ट की अदालत ने नौ महीने बाद ही बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को दूसरी बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस बार गाजीपुर के 33 वर्ष तीन महीने नौ दिन पुराने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सजा सुनाई गई है। 2.02 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में मुख्तार के खिलाफ 4 दिसंबर 1990 में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इससे पहले अदालत ने अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को 5 जून 2023 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पिछले 18 महीने में मुख्तार को आठ मामलों में सजा मिल चुकी है। उसके खिलाफ करीब 65 मुकदमे दर्ज हैं। मुख्तार 18 वर्षों से जेल में है।

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एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अवनीश गौतम की अदालत ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में बुधवार को मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई। मुख्तार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत के समक्ष पेश किया गया। इस बीच अदालत ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि मुख्तार को अधिकतम दंड से असामाजिक तत्व हतोत्साहित होंगे। 



जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना अभियुक्त के दुस्साहस और आपराधिक मनोवृत्ति को दर्शाता है। समाज में ऐसे व्यक्ति, जो इस प्रकार के अपराध से मनमानी करके अपराध की दुनिया में पहचान बनाते हैं। नवयुवकों के अपरिपक्व मस्तिष्क को दुष्प्रेरित कर उनके आदर्श भी बन जाते हैं। इससे समाज पर बुरा असर पड़ता है। समय पर समुचित कार्रवाई के अभाव में ऐसे व्यक्ति बाद में स्वयं माफिया और अपराधी बन जाते हैं।
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इसकी पुष्टि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास करता है। ऐसे अपराध सामान्य अपराध के उदाहरण नहीं हैं। इसमें जिले के वरिष्ठतम सेवा के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर हुए हैं। गलत तरीके से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अपराध की गंभीरता है। इसे विशिष्ट श्रेणी में रखते हुए अधिक दंड दिया जाना आवश्यक है।

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अभियोजन की ओर से एडीजीसी विनय कुमार सिंह और अभियोजन अधिकारी उदय राज शुक्ला ने पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक मुख्तार अंसारी ने 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए गाजीपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी के यहां प्रार्थना पत्र दिया था।

बाद में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर से संस्तुति प्राप्त करते हुए मुख्तार ने शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर लिया था। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सीबीसीआईडी ने गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में मुख्तार अंसारी, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर समेत पांच नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

जांच के बाद तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव और मुख्तार अंसारी के विरूद्ध 1997 में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान गौरीशंकर की मृत्यु होने के कारण उसके विरूद्ध 18 अगस्त 2021 को मुकदमा समाप्त कर दिया गया। अब अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना और माफिया मुख्तार अंसारी को चार अलग-अलग धाराओं में दर्ज मुकदमे सजा सुनाई गई है। जुर्माना भी लगाया गया है।
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बचाव पक्ष बोला... मुख्तार बुजुर्ग-बीमार और जेल में, कम मिले सजा

मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अदालत ने मुख्तार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) में दोषमुक्त किया है। शेष धाराएं मजिस्ट्रेट द्वारा परीक्षणीय हैं। इस अदालत को दंड के प्रश्न पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि प्रकरण में अभियुक्त पर कोई स्वयं से कार्य करने का अपराध नही है और न ही कथित सहअभियुक्त के साथ एकसाथ विचारण किया गया। अभियुक्त को मात्र लाभार्थी मानते हुए बिना किसी प्रत्यक्ष साक्ष्य के दोषसिद्ध किया गया है।

अभियुक्त अत्यंत वृद्ध और बीमार है। कई वर्षों से जेल में है। इसलिए अभियुक्त को न्यूनतम दंड से दंडित किया जाए। बचाव पक्ष ने क्रिमिनल हिस्ट्री के तर्क का बचाव किया। कहा कि घटना वर्ष 1986-87 की है। तब अभियुक्त की आयु लगभग 22 वर्ष की रही होगी। उस समय के आपराधिक इतिहास को ही विचारित किया जा सकता है, जबकि उक्त वर्ष का कोई भी आपराधिक इतिहास अभियुक्त का नहीं है। अत: ऐसी दशा में घटना के बाद दर्शित समस्त आपराधिक प्रकरणों को दंड के प्रश्न पर विचारित नहीं किया जा सकता।

अभियोजन ने कहा... मुख्तार का लंबा आपराधिक इतिहास, अधिकतम मिले सजा
अभियोजन अधिकारी ने मुख्तार अंसारी के आपराधिक इतिहास के दोष सिद्धि के संबंध में चार्ट प्रस्तुत किया। अदालत को बताया कि गैंगस्टर एक्ट, हत्या सहित कई मामलों में अलग-अलग अदालतों ने दोष सिद्ध किया है। इसमें आजीवन कारावास की सजा भी शामिल है। लगभग 20 मामलों के प्रकरण विचाराधीन हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास है। अतः अभियुक्त को अधिकतम दंड से दंडित किया जाए।
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