लच्छनपुरा में बैठाई गई जाली वाली ताजिया।
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आज और कल अकीदतमंद रखेंगे रोजा
मोमिन 10वीं व 11वीं मुहर्रम को रोजा रखेंगे। कुछ 10वीं मुहर्रम को तो कुछ 10 व 11 मुहर्रम को रोजा रखते हैं। मौलाना अजहरुल कादरी ने बताया कि मुहर्रम की दस तारीख के रोजे की बहुत फजिलत है। कर्बला के मैदान में शहादत देकर इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया है।
अंगारों से गुजरा जुलूस, गूंजे या हुसैन की सदाएं
विश्व प्रसिद्ध दूल्हे का जुलूस नौवीं मुहर्रम शनिवार की रात में शिवाला इमामबाड़े से निकला। 40 किमी तक निकले जुलूस में 70 जगहों पर आग के अंगारे जले थे। अकीदतमंद इन अंगारों से होकर गुजरे। जुलूस में लाखों की भीड़ उमड़ी रही।
हजरत कासिम नाल दूल्हा कमेटी के जेरे इंतजाम और सदर परवेज कादिर खां के नेतृत्व में देर रात शिवाला से जुलूस उठा। सुन्नी समुदाय की ओर से उठे इस जुलूस में अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा रहा। जगह-जगह आग अंगारे जलाए गए थे। या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए आग से होकर गुजर रहे थे।
जुलूस अस्सी, दुर्गाकुंड, गौरीगंज, भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, रामापुरा, गिरजाघर, नई सड़क, औरंगाबाद, लल्लापुरा, दरगाहे फातमान सुबह पहुंचेगा। जहां से पितरकुंडा, चेतगंज चौराहे, बेनियाबाग, दालमंडी, कच्चीबाग, रेशमकटरा, कुंजीटोल, पत्थरगलिया, दशाश्वमेध, गोदौलिया, मदनपुरा होकर शिवाला दोपहर दो बजे पहुंचकर समप्त हो जाएगी।
कमालपुरा में बैठाई गई रांगे की ताजिया।
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बनारस की शान नामचीन ताजिये, बढ़ाती है जुलूस की खुबसूरती
बनारस की नामचीन ताजिये शान हैं। मुहर्रम पर नामचीन ताजियों की खुबसूरती देखते बनता है। कुछ ताजिया बाकी का नेतृत्व भी करते हैं। रांगे की ताजिया लल्लापुरा से उठाई जाती है। एक विशेष प्रकार की इस ताजिये में रांगे (एक धातु) से बनाया जाता हे। यह ताजिया 70 किलो रांगे से बनी है। इसे पंचों का रांगा के नाम से जाना जाता है। यह ताजिया साखू, सागवान और शीशम की लकड़ी से बनी है और इसपर रांगे की डिजाइन लगाई गई है। दरगाहे फातमान में ठंडा होता है।
कोयला बाजार में बैठाई जाने वाली नगीना की ताजिया आजादी के पहले से रखी जाती है। यह शीशम की लकड़ी पर शीशे और नगीना आदि से तैयार की गई है, जो काफी खुबसूरत है। यह ताजिया सदर इमामबाड़ा जाती है। कुम्हार का इमामबाड़ा हरिश्चंद्र घाट के पास बैठाई जाती है। यह ताजिया मंदिरनुमा आकार में है।
यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। शिवाला घाट पर ठंडा होती है। पीतल का ताजिया दालमंडी के पास फारूकी इमामबाड़े में बैठाई जाती है। यह ताजिया शुद्ध पीतल से बना है। इसे मुरादाबाद के कारीगरों ने बनाया था। विशेष नक्काशी इसकी खासियत है। यह ताजिया दरगाहे फातमान आती है।
औसानगंज में बुर्राक की ताजिया बैठाई जाती है। इसे स्वर्ग की सवारी को बुर्राक कहते हैं। इसकी की कल्पना को साकार किया गया है। यह काफी खुबसूरत है। यह ताजिया दरगाहे फातमान आती है। बजरडीहा स्थित शीशे का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की जरी की ताजिया और गौरीगंज की शीशम की ताजिया भी प्रसिद्ध है।
दोषीपुरा में बैठाई गई ताजिया।
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मोहर्रम को लेकर जैतपुरा समेत मिश्रित आबादी क्षेत्रों में कमिश्नरेट पुलिस विशेष सतर्क रही। संवेदनशील जैतपुरा के दोषीपुरा में पुलिस की विशेष निगरानी रही। शनिवार की शाम दोषीपुरा मैदान में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। मौके पर अपर पुलिस आयुक्त राजेश कुमार सिंह, महिला पुलिसकर्मी और पीएसी की एक प्लाटून मौजूद रही।
आदमपुर, कज्जाकपुरा, सरैया, मदनपुरा, बजरडीहा, कैंट थाना क्षेत्र में पुलिस ने पैदल गश्त की और कानून व्यवस्था परखी। ताजियादारों से संवाद किया। कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा ने जामा मस्जिद नदेसर में ताजियादारों से बात की।
लोहता थाना क्षेत्रों में शाम चार बजे ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रहीमपुर, मीना बाजार, अलावल, बड़ी मस्जिद, धमरिया से बड़ी छोटी कुल 11 ताजिये शाम पांच बजकर 30 मिनट पर लोहता चौमुहानी पर पहुंचे। इसके बाद हरपालपुर स्थित सूफी शहीद की मजार तक गया। इस दौरान वाराणसी-भदोही मार्ग पर छोटे बड़े वाहनों को धन्नीपुर एवं धमरिया पुल से बंद कर दिया गया था।
एसीपी रोहनिया, थानाध्यक्ष मंडुवाडीह, रोहनिया के अलावा जगह-जगह केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल तैनात रही। बड़ागांव थाना क्षेत्र बसनी के मिश्रित आबादी क्षेत्रों में पुलिस ने पैदल गश्त की। प्रभारी निरीक्षक अतुल सिंह ने बताया कि स्थानीय नागरिकों से संवाद किया गया। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की।