MSME Conclave in Varanasi: अमर उजाला की ओर से आयोजित एमएसएमई मंथन में औद्योगिक विकास, निर्यात संवर्धन, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत, इन दो महामंत्रों से मृत हो चुके एमएसएमई सेक्टर को जीवित कर दिया। वहीं, योगी सरकार की सुरक्षा के चलते अब उद्योगों को प्रदेश में निवेश के लिए सोचना नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि जब दूसरी पार्टी की सरकार थी, तब लोग उत्तर प्रदेश को उल्टा प्रदेश और बीमारू राज्य कहते थे। लेकिन, अब एक साल के अंदर यहां डेटा सेंटर बनकर तैयार हो जाता है। कभी यूपी में दो ही एयरपोर्ट थे, लेकिन आठ वर्षों में जब से मुझे सिविल एविएशन की जिम्मेदारी मिली, कुल 16 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन चुके हैं।
मंत्री नंदी ने कहा कि इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए हमें 800 करोड़ रुपये का फंड मिला है। सभी इंडस्ट्रियल एरिया का इंफ्रास्ट्रक्चर सुंदर और बेहतर होगा। और सबसे जरूरी इंडस्ट्रियल एरिया को धूल मुक्त बनाना है। यहां जर्मनी और फ्रांस जैसी तकनीक लागू करनी होगी। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर समिट में 35 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए। मेरठ-प्रयागराज के साथ ही आठ और एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी है। अगले दो साल में देश के कुल 50 प्रतिशत से ज्यादा एक्सप्रेस-वे यूपी में होंगे।
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काशी को दिया इंटरनेशनल ट्रेड शो का आमंत्रण
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने नोएडा में होने वाले इंटरनेशनल ट्रेड शो और एक्सपो में काशी के व्यापारियों को आमंत्रित किया। कहा कि इस वर्ष यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे संस्करण का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे। रूस पार्टनर देश होगा। इसमें आपको बनारस की कचौड़ी-जलेबी सहित सभी 75 जिलों के सुप्रसिद्ध खानपान के स्टॉल मिलेंगे। ओडीओपी से लेकर जीआई टैग वाले उत्पादों की प्रदर्शनी लगेगी। आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के माध्यम से बनारसी साड़ी, भदोही की कालीन और प्रयागराज के अमरूदों को वैश्विक पहचान मिली है। इसकी कहानी भी वहां आए लोगों को उन्हीं की भाषा में बताई जाएगी। यहां पर विदेशी भाषाओं के जानकार भी मौजूद होंगे।
कुछ गुंडे बहुत दूर चले गए... जहां से वापस आना संभव नहीं
मंत्री नंदी ने कहा कि पहले गुंडे, माफिया और अपराधी किसी की पिटाई कर देते थे तो पीड़ित पर ही कार्रवाई हो जाती थी। माफिया पुलिस के कप्तान को आदेशित- निर्देशित करते थे। झगड़ा हुआ तो पुलिस ही मार खा जाती थी। लोग समझौते के लिए बदमाशों के ही पास जाते थे। मगर, आज यूपी सरकार आठ वर्षों में कुछ माफिया दूर गए और कुछ बहुत दूर चले गए हैं, जहां से वापस आना संभव ही नहीं है। यूपी की शक्ति को कम करने के लिए पिछली सरकारों ने सिर्फ एक एजेंडे पर काम किया। कैसे हम, चाचा, मामा, मौसी और बुआ के लड़के के पद पर बन जाए। इससे बाहर आए तो जाति तक सीमित हो गए। इससे निकले तो तुष्टीकरण की राजनीति की। उनकी प्राथमिकता में कभी अच्छी सड़कें और अस्पताल नहीं थे।