परिवार के अभिभावक और प्रेरणास्रोत
मनोज तिवारी ने अपने बड़े भाई को परिवार का अभिभावक बताया। उन्होंने लिखा कि साधु शरण तिवारी उनके लिए ईश्वर के समान थे। मनोज तिवारी के गायन कॅरिअर को दिशा देने में उनका अहम योगदान रहा। उन्होंने मनोज तिवारी को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। साधु शरण तिवारी ने उन्हें सफलता की सीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पेशेवर जीवन और योगदान
साधु शरण तिवारी ने आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ओएनजीसी में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया। कोलकाता, असम के नाजीरा-शिवसागर और मुंबई जैसे शहरों में उनकी तैनाती रही। अपने अनुभव और विशेषज्ञता से उन्होंने संस्थान में महाप्रबंधक का पद प्राप्त किया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने वाराणसी को अपना स्थायी निवास बनाया।
अंतिम मुलाकात और मनोज तिवारी की भावनाएं
मनोज तिवारी ने अपने बड़े भाई के साथ अपनी अंतिम मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि साधु शरण तिवारी का स्वभाव हर मुलाकात में कुछ समझाने का था। अपनी अंतिम भेंट में साधु शरण तिवारी ने मनोज तिवारी को एक कविता सुनाई थी। मनोज तिवारी को उस समय यह आभास नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में इस दुखद क्षण को साझा किया। यह उनके लिए एक गहरा व्यक्तिगत नुकसान है।