मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामसेवक की मृत्यु हो गई, जबकि राजेश उर्फ छोटू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन को दोषी करार दिया। पवन मौर्य ने कहा कि वर्षों तक अदालत के चक्कर काटने के बाद न्याय मिलना राहत की बात है, लेकिन इतने लंबे समय बाद मिले न्याय की पीड़ा अलग है।
उन्होंने बताया कि हत्या के समय आशीष का छेका हो चुका था और तीन महीने बाद उसकी शादी होनी थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन एक घटना ने सब कुछ बदल दिया। पवन और जियालाल के मुताबिक, न्याय की लड़ाई में परिवार को करीब 1500 तारीखों पर अदालत जाना पड़ा।
आरोपियों की ओर से मामले में स्टे लिए जाने के कारण उन्हें 10 से 12 बार हाईकोर्ट की शरण भी लेनी पड़ी। अब 26 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी है। परिवार को उम्मीद है कि दोषियों को कम से कम उम्रकैद की सजा मिलेगी। परिजनों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है।