पक्के महाल यानी पुराने बनारस में विकास का पहिया दौड़ाने एवं प्राचीनता के साथ आधुनिकता का खाका खींचने के लिए सोमवार की देर रात नगर निगम के साथ तीन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के करार पर अंतिम मुहर लग गई।
नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही और कंपनी के प्रतिनिधियों ने कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए। बैंक गारंटी परफारमेंस के कारण करार एक महीने से लटका हुआ था।
अस्सी से राजघाट यानी पक्के महाल को स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकसित किया जाना है। इसमें सड़क, सीवेज, बिजली, यातायात, पर्यटन, गंगा घाट, विरासतें, धरोहरों एवं एतहासिक स्थलों को संरक्षित एवं सवंद्धित किया जाना है।
जिसमें रुद्रा इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड ,ग्रांट थारटन और एएनबी कंपनियां हैं। जून के प्रथम सप्ताह से डीपीआर बनाने का कार्य शुरु हो जाएगा। डीपीआर तैयार होने के साथ ही उसे धरातल पर उतारा जाएगा। 20 सितंबर 2016 को स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के बाद विकास के लिए स्पेशल परपज ह्वेकल केतहत वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड (वीएससीएल) के एक कंपनी के रूप में पंजीयन पिछले साल हो चुका है।
आईटी क्षेत्र की कंपनी ग्रांट थारटन इंडिया लिमिटेड विकास की तकनीक, लखनऊ की कंपनी रुद्राभिषेक इंटरप्राइजेज कंपनी लिमिटेड (आरईसीएल) संसाधन के क्षेत्र में और नोयडा की कंपनी एएनबी को धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में काम करेगी। वीएससीएल कंपनी के नामित चेयरमैन मंडलायुक्त और सीईओ नगर आयुक्त होंगे।
1300 एकड़ में होगा दौड़ेगा विकास का पहिया
अस्सी से राजघाट तक करीब 1300 एकड़ की आबादी वाले क्षेत्र में विकास होगा। काशी के घाट से लेकर गलियां, सड़क, सीवेज, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल, कंप्यूटर सफाई व्यवस्था आदि को विकसित किया जाना है। यातायात, जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे, कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली, सहित 21 बिंदुओं पर काम होना है।
हृदय, अमृत, प्रसाद और आईपीडीएस को भी किया जाएगा शामिल
फिलहाल काशी में हृदय, अमृत, प्रसाद और आईपीडीएस केक्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिया जाएगा। इसी उद्देश्य से पुराने बनारस में काम भी चल रहा है। सड़क, सीवेज, यातायात, धरोहर संरक्षण, हेरिटेज लाइट लगाने का काम भी शुरू है।
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