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बनारसः गंगा में जल परिवहन की सभी बाधाएं खत्म, आसानी से चलेंगे मोटर बोट, स्टीमर और क्रूज

Wed, 26 Sep 2018 11:04 AM IST
पीयूष तिवारी, अमर उजाला, वाराणसी
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हल्दिया से वाराणसी तक आने वाले पानी के जहाजों को काशी के गंगा घाटों तक पहुंचने से पहले अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। अब पानी के जहाज बिना किसी रुकावट के 24 घंटे आवाजाही कर सकेंगे।
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यही नहीं, काशी में मोटर बोट, स्टीमर, क्रूज भी गंगा में आसानी से चल सकेंगे। दरअसल, कछुआ सेंक्चुअरी को यहां से इलाहाबाद शिफ्ट किया जा रहा है। स्टेट वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड ने इसके लिए अनुमति दे दी है।

प्रदेश सरकार की कैबिनेट में इसका प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा जाएगा। फिलहाल, सेंक्चुअरी को इलाहाबाद और सीतामढ़ी के बीच मेजा के पास कोठरी गांव के समीप डाउन स्ट्रीम में 30 किमी आगे शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।
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हल्दिया से वाराणसी तक सुगम जल परिवहन के लिए रामनगर में 5200 करोड़ रुपये से मल्टी मॉडल टर्मिनल बनाया जा रहा है। कछुआ सेंक्चुअरी के चलते गंगा में जल परिवहन की महत्वाकांक्षी योजना प्रभावित हो रही थी। इसके मद्देनजर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने तीन माह पहले सर्वे कर सेंक्चुअरी की शिफ्टिंग को हरी झंडी दे दी।
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सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई बैठक

रिपोर्ट के आधार पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में स्टेट वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड की बैठक लखनऊ में हुई है। इसमें सेंक्चुअरी को वाराणसी के डाउन स्ट्रीम में शिफ्ट करने के विचार पर चर्चा हुई और पाया गया कि इससे भी जल परिवहन भी प्रभावित होगा।

डीएफओ मनोज खरे ने बताया कि मुख्यमंत्री की सहमति के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक अपनी रिपोर्ट तैयार कर मुख्य सचिव को भेजेंगे। इस पर प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे भारत सरकार को भेज दिया जाएगा।

गंगा में प्रदूषण कम करने के लिए 1989 में रामनगर से खिड़किया घाट तक कछुआ सेंक्चुअरी बनाने का प्रस्ताव बनाया गया। मांसाहारी कछुओं को छोड़ने के लिए 1998 में कछुआ सेंक्चुअरी का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके बाद मोटर बोट और स्टीमर चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 
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