साधु ने पहले उन्हें कलम देने से मना कर दिया था। बाद में साधु खुद राजमहल गए और काशी नरेश को आम की कलम भेंट की। अब कचहरी में आम का बगीचा तो नहीं इसकी जगह अब एसबीआई की इमारत और आवास हैं। फिलहाल यहां लंगड़े आम का मातृ पेड़ सुरक्षित है। जिसके साथ दो और आम के पेड़ और कुछ आशोक के पेड़ हैं। विरासत में शामिल होने के बाद वन विभाग की ओर से जल्द बोर्ड लगाया जाएगा।