श्री काशी विश्वनाथ धाम में आदिविश्वेश्वर से उनकी पुत्री नर्मदा का मिलन हुआ। द्वादश ज्योतिर्लिंग की पदयात्रा पर निकली माता सुमन गिरि ने शुक्रवार को नर्मदा के जल से भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। भगवान विश्वेश्वर का मां नर्मदा के जल से अभिषेक धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व का आयोजन तो है ही, यह पिता पुत्री के परस्पर स्नेह और सनातन मानस में इस पवित्र संबंध की स्थायी स्मृति अंकित करने वाला अनुष्ठान भी है।
शुक्रवार को संत माता सुमन गिरि अपनी बारह ज्योतिर्लिंग पदयात्रा के अभियान में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचीं। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। मां नर्मदा भगवान शिव की पुत्री हैं और उनके जल से किया गया अभिषेक धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता सुमन गिरि अपनी पदयात्रा के दौरान रोज करीब 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलती हैं। यात्रा के क्रम में वे हर दिन मार्ग में किसी एक श्रद्धालु के घर में रात्रि विश्राम करती हैं। वहीं पर ध्यान, पूजन और भोजन की व्यवस्था होती है। इसके बाद वे कुटुंब प्रबोधन एवं सामाजिक समरसता पर आधारित संवाद व बैठक आयोजित करती हैं। उनकी यह पद यात्रा न केवल धार्मिक जागरण का अभियान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, साधना और सामाजिक समरसता के पुनर्स्थापन का एक सबल प्रयास भी है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने कुछ महीने में पहले ही रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग धाम से परस्पर तीर्थ जल के आदान प्रदान का नवाचार प्रारंभ किया है। इस नवाचार के अंतर्गत त्रिवेणी संगम प्रयागराज से गंगाजल लेकर भगवान विश्वनाथ आता है और फिर यहां से रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग अभिषेक के लिए भेजा जाता है। वहीं, रामेश्वरम से कोडितीर्थम सागर जल भगवान विश्वनाथ के अभिषेक के लिए आता है। जलाभिषेक के बाद माता सुमन गिरि अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गईं।