चंदौली जिले के बलुआ घाट पक्कापुल से एक महिला ने रविवार को दो बच्चों के साथ गंगा में छलांग लगा दी। उन्हें बचाने के लिए महिला का भाई भी उनके पीछे कूद पड़ा। मल्लाहों ने उसे बचा लिया, लेकिन महिला और बच्चों का पता नहीं चल सका। पुलिस गोताखोर और एनडीआरएफ की अबतक की मेहनत का बाद केवल चार साल की बच्ची का शव ही तलाश कर पाई है।
वाराणसी चौबेपुर के लूठा कलां गांव के पोल्हावन यादव ने पुत्री पूजा (30) की शादी छह साल पहले बलुआ थाना क्षेत्र के लक्षमनगढ़ गांव के बहाल यादव के पुत्र दिनेश से की थी। पूजा ने रविवार सुबह मायकेवालों को दहेज प्रताड़ना की बात बताई। दिन में छोटा भाई धीरज (13) उसे ससुराल से विदा कराकर घर आ रहा था।
पूजा के साथ दोनों बच्चे आयुषी (4) और सत्यम (5) भी थे। ढाई बजे के करीब सभी बलुआ घाट पक्का पुल पर पैदल ही जा रहे थे। धीरज आगे चल रहा था। इसी बीच पूजा ने दोनों बच्चों को गंगा में फेंक दिया, फिर खुद भी नदी में छलांग लगा दी। उन्हें बचाने के लिए धीरज भी उनके पीछे नदी में कूद पड़ा।
यह देख कुछ मल्लाह भी नदी में कूद पड़े और धीरज को बचा लिया, किंतु तेज धारा में पूजा और दोनों बच्चों का पता नहीं चला। पूजा की मां किरन और पिता पोल्हावन ने बताया कि सुसराल वाले पूजा को दहेज के लिए हमेशा प्रताड़ित करते थे।
रविवार को भी ससुराल वालों द्वारा उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने की जानकारी फोन से मिली थी। तब विवाहिता के भाई धीरज उर्फ गोलू को लेने के लिए भेजा गया था। मायके वालों ने विवाहिता के जेठ-जेठानी, सास, देवर व ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना को लेकर बलुआ थाने में तहरीर दी है।