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Varanasi News: फाइलों में दबकर रह गए पांच हजार से ज्यादा ध्वस्तीकरण के आदेश

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वाराणसी। बदलते बनारस की खूबसूरती में बाधक बन रहे अवैध निर्माणों पर विकास प्राधिकरण के अधिकारी मेहरबान हैं। पांच हजार से ज्यादा अवैध निर्माणों को ध्वस्तीकरण के आदेश जारी हैं और बीते डेढ़ साल में ही 22 हजार अवैध निर्माणों को सुनियोजित विकास के नाम पर नक्शा पास कराने का नोटिस दिया गया है। मगर, नोटिस जारी करने के बाद अधिकारी आगे की कार्रवाई ही भूल गए। कुछ बड़े अवैध निर्माणों पर हथौड़ा चलाकर खानापूर्ति जरूर की गई, मगर फिर से उसे वैसे ही छोड़ दिया गया।
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अवैध निर्माण को लेकर प्रदेश स्तर पर हुई रैंकिंग में वाराणसी विकास प्राधिकरण की किरकिरी के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। आदेश ध्वस्तीकरण का कर दिया गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। इसका फायदा अवैध निर्माण करने वाले उठा रहे हैं।

केस-1
गोदौलिया के पास बड़ादेव में अवैध निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री गिरने से वर्ष 2022 में एक युवती की मौत हो गई थी। इसके बाद वीडीए ने ध्वस्तीकरण का आदेश पर अमल करते हुए इसे गिराना शुरू किया। तीन-चार दिन तक कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की गई और अवैध निर्माण को जस का तस छोड़ दिया गया। गोदौलिया से काशी विश्वनाथ मंदिर के रास्ते में यह चार मंजिला अवैध निर्माण खड़ा है।
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केस-2
नई सड़क पर बिना अनुमति के पांच मंजिला अवैध निर्माण पूरा होने के बाद वीडीए ने ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया। इसके बाद एक दिन यहां कार्रवाई के नाम पर कुछ तोड़फोड़ भी की गई। मगर, इसके बाद अवैध निर्माण को वैसा ही छोड़ दिया गया है। अवैध निर्माण में अब काम भी शुरू किया गया है।

केस-3
महमूरगंज से सिगरा मार्ग पर व्यावसायिक और आवासीय को मिलाकर बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण कर लिया गया। इसके बाद वीडीए ने नोटिस जारी किया तो नक्शा पास कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें कंपाउंडिंग के अलावा अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए निर्माणकर्ता ने शपथपत्र दिया और नक्शा पास करा लिया। मगर, अवैध निर्माण जस का तस खड़ा है।

शपथ पत्र के खेल से अवैध निर्माणों को छूट
दो हजार से ज्यादा ऐसे बड़े अवैध निर्माण हैं, जिन्हें ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी है और निर्माण करने वालों ने उसे खुद तोड़ने के शपथपत्र विभाग में दिए हैं। दरअसल, अवैध निर्माण के बाद नक्शा कंपाउंड कराने में वीडीए शपथ पत्र लेकर ध्वस्तीकरण को खुद तोड़ने का मौका देता है। इसी आड़ में ज्यादातर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।

नियमों का हवाला देकर अवैध निर्माणों को शह
शहर में होने वाले अवैध निर्माणों को विकास प्राधिकरण के अधिकारी शह देते हैं। सील की कार्रवाई के बाद नक्शा दाखिल करने पर ही उसे खोल दिया जाता है। कई मामलों में तो सील के बाद निर्माण पूरा हो गया और शमन मानचित्र दाखिल किया गया। वाराणसी मेें एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण अब तक चिह्नित हैं। शहर के आसपास रोहनिया, रामनगर, लंका, नगवा और शिवपुर में अवैध काॅलोनियां विकसित की जा रही हैं। आलम यह है कि गांव के खेतों में प्लाट बेचे जा रहे हैं। मगर, वीडीए एकाध कार्रवाई कर रसूखदारों को शह देता है।


ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करने पर वीडीए का तर्क
घनी आबादी में जेसीबी या पोकलैंड से कार्रवाई में बाधा
भीड़भाड़ वाले इलाके में यातायात रोककर कार्रवाई में दिक्कत
पुलिस फोर्स की उपलब्धता नहीं होने से कार्रवाई में देरी
हथौड़े और छोटे संसाधनों से अवैध निर्माण में ज्यादा समय लगता है
वर्जन

शहर में अवैध निर्माणों के 22 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं और उनकी समीक्षा कराई जा रही है। जिन अवैध निर्माणों का नक्शा स्वीकृत हो सकता है उनकी फीस जमाकर उसे वैध किया जाएगा और बाकी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। - कौशल राज शर्मा, मंडलायुक्त
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