संत मोरारी बापू की ‘मानस मसान’ राम कथा शनिवार से वाराणसी में शुरू हो गई। बापू ने व्यासपीठ से मसान को लेकर दिलचस्प संस्मरण सुनाकर कथा प्रेमियों को चकित कर दिया। बापू ने उस प्रसंग का जिक्र किया जब उन्हें एक बार किसी परिचित ने मुंबई में श्मशान के उद्घाटन के लिए बुला लिया था।
तब संकट दूर करने के लिए उन्हें अनेक युक्तियां सोचनी पड़ी थीं। हनुमान जी का स्मरण करना पड़ा था। इसलिए कि उनमें अभी जीवन जीने की इच्छा थी। अंतत: ईश्वर ने सुन ली और एक ऐसी वृद्ध महिला के पार्थिव शरीर को लेकर अग्नि संस्कार के लिए लोग वहां पहुंचे और उनको संकट से छुटकारा मिल सका।
सतुआ बाबा के गोशाला परिसर के 15 बीघा क्षेत्रफल में एसी कॉटेज और मणिकर्णिका महाश्मशान की अनुकृति वाले विशाल पंडाल में मोरारी बापू की रामकथा सुनने अपार जन सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर बाद अस्सी घाट पर पास गंगा के आगे शीश नवाकर बापू नाव से कथास्थल पर पहुंचे।
वहां पोथी शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारे के साथ बापू व्यासपीठ पर आसीन हुए। मानस की स्वरमयी पंक्तियों के साथ लय-ताल के समन्वय पर कथा प्रेमी झूमने लगे।
बापू ने बाबा विश्वनाथ की नगरी में मानस मसान की व्याख्या को गति दी। बताया कि गोस्वामी तुलसी दास ने रामचरित मानस में सिर्फ तीन बार मसान शब्द का उल्लेख किया है। बाल कांड से लंका कांड तक मृत्यु के प्रसंग कहीं न कहीं आए हैं लेकिन उत्तर कांड में मृत्यु के भय का संदेश नहीं मिलता। इसे अमरत्व का कांड कहा जा सकता है।