दशाश्वमेध घाट का नजारा
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शास्त्रों में तीन माह पर्यंत नित्य स्नान दान का विधान है। इसमें माघ, कार्तिक और वैशाख शामिल हैं। अन्य दोनों स्नान की तरह माघ स्नान को भी आयुर्वेदिक दृष्टि से ऋतु अनुसार शारीरिक अनुकूलन का अनुष्ठान माना जाता है। इन तीनों माह में सूर्योदय के समय गंगा, प्रयागराज संगम समेत नदी-तीर्थ में स्नान की मान्यता है।
माना जाता है कि माघ मास में जहां कहीं भी जल हो वह गंगाजल के समान ही होता है, फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, काशी, नासिक, उज्जैन तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। स्नान से पूर्व हरि-हर का ध्यान, स्नान के दौरान सूर्यदेव को अर्घ्य और बाद में श्रीहरि का पूजन-अर्चन करना चाहिए। माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं।
नमामि गंगे व गंगा टास्क फोर्स ने गंगा पर्यावरण के प्रति किया जागरूक
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गंगा जल की निर्मलता और पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए पौष पूर्णिमा पर अभियान चलाया गया। नमामि गंगे व 137 बटालियन सीआरपीएफ, प्रादेशिक सेना गंगा टास्क फोर्स ने शुक्रवार सुबह दशाश्वमेध, प्रयाग, आरपी घाट पर जगह-जगह फेंके गए कूड़े-कचरे को साफ किया। घाटों पर श्रमदान के बाद पर्यटकों और आम लोगों को गंगा और घाटों को स्वच्छ रखने की शपथ भी दिलाई गई। गंगा मैया की जय के बीच नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में सभी ने 'सबका साथ हो, गंगा साफ हो' के नारे संग प्रत्येक काशीवासी को गंगा स्वच्छता से जुड़ने की अपील की।