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UP: बंदरों और कुत्तों का आतंक, बनारस में हर साल 80 लाख खर्च फिर भी 2500 लोगों को बनाया शिकार

Thu, 15 Jan 2026 04:28 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में बंदरों और कुत्तों का आतंक जारी है। यहां  नगर निगम द्वारा इन पर 80 लाख रुपये हर साल खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिले में 2500 लोगों को कुत्तों व बंदरों ने अपना शिकार बनाया। 
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शहर में घूमते बंदर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी नगर निगम की ओर से हर साल 80 लाख रुपये कुत्ता और बंदरों पर खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके ये कंट्रोल में नहीं हैं। रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 2000 बंदरों को पकड़ कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया है। 4000 कुत्तों का बंध्याकरण किया गया है। इसके बाद भी कुत्ते और बंदर से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

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अदालत की टिप्पणी के बाद पिसौर में नए श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यहां कुत्तों को रखा जाएगा। शहर में आवारा कुत्तों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। ये आवारा कुत्ते आए दिन लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। मंडलीय अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार रैबीज इंजेक्शन के 60-80 केस प्रतिदिन आ रहे हैं। 

इस वित्तिय वर्ष में आवारा कुत्तों ने 2500 लोगों को अपना शिकार बनाया। उधर, शहर में बंदरों संख्या 30 हजार से ज्यादा जबकि कुत्तों की संख्या 60 हजार है। इनका आतंक मंदिरों और पक्के महाल के क्षेत्रों में काफी ज्यादा है। मंडुवाडीह, सुंदरपुर, महमूरगंज, औरंगाबाद, सिद्धगिरीबाग, सिगरा, विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध, चौक, लंका आदि क्षेत्रों में बंदरों का उत्पात देखा जा सकता है। 

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नगर निगम के अनुसार कुत्तों के लिए ऐढ़े में एबीसी सेंटर बनाया गया है। जहां शहर के खूंखार कुत्तों को एकल बैरक में रखा जाता है। सेंटर में 40 एकल और 10 सामूहिक बैरक टाइप बनाए गए हैं। एकल में एक और सामूहिक में 10 कुत्ते साथ रहते हैं। एकल बैरक में खूंखार और रैबीज वाले कुत्ते को रखकर इलाज किया जाता है जबकि सामूहिक में सामान्य कुत्तों का इलाज होता है।
 
कुत्तों का बंध्याकरण और बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जाता है। वहां से इन बंदरों का वापस लौटना मुश्किल है। हाल ही में पिसौर में श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जहां सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को भेजा जाएगा। - डॉ. संतोष पाल, चिकित्सा अधिकारी

कुत्ते और बंदर से जुड़ी सूचना 1533 पर दें
बंदर और कुत्ते से जुड़े किसी भी प्रकार की सूचना नगर निगम के कंट्रोल रूम में 1533 पर दी जा सकती है। कुत्तों के लिए हर जिले में एसपीसीए है। इसका फुल फॉर्म सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल है। हिंदी में इसे पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी कहते हैं। इसकी स्थापना 1824 में इंग्लैंड में हुई थी। ये पशु कल्याण के लिए अभियान चलाते हैं।
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