नगर निगम के अनुसार कुत्तों के लिए ऐढ़े में एबीसी सेंटर बनाया गया है। जहां शहर के खूंखार कुत्तों को एकल बैरक में रखा जाता है। सेंटर में 40 एकल और 10 सामूहिक बैरक टाइप बनाए गए हैं। एकल में एक और सामूहिक में 10 कुत्ते साथ रहते हैं। एकल बैरक में खूंखार और रैबीज वाले कुत्ते को रखकर इलाज किया जाता है जबकि सामूहिक में सामान्य कुत्तों का इलाज होता है।
कुत्तों का बंध्याकरण और बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जाता है। वहां से इन बंदरों का वापस लौटना मुश्किल है। हाल ही में पिसौर में श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जहां सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को भेजा जाएगा। - डॉ. संतोष पाल, चिकित्सा अधिकारी
कुत्ते और बंदर से जुड़ी सूचना 1533 पर दें
बंदर और कुत्ते से जुड़े किसी भी प्रकार की सूचना नगर निगम के कंट्रोल रूम में 1533 पर दी जा सकती है। कुत्तों के लिए हर जिले में एसपीसीए है। इसका फुल फॉर्म सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल है। हिंदी में इसे पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी कहते हैं। इसकी स्थापना 1824 में इंग्लैंड में हुई थी। ये पशु कल्याण के लिए अभियान चलाते हैं।