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गंगा के कम पानी में भी चलेंगे आधुनिक जलपोत, जर्मनी में किया गया परीक्षण

Sun, 02 Sep 2018 05:53 PM IST
जयेंद्र चतुर्वेदी, अमर उजाला, वाराणसी
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गंगा में वाराणसी से हल्दिया के बीच जल परिवहन के लिए शुक्रवार को आईडब्ल्यूएआई ने भारत के सबसे पहले 13 मानकीकृत आधुनिक जहाजों के डिजाइन को सार्वजनिक कर दिया। इन्हें गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) पर माल ढुलाई के लिए उपयुक्त बताया गया है।
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गंगा नदी की जल धारा, गति, तीव्र मोड़ और अस्थायी वाहिकाओं के कारण जल परिवहन में होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर जहाज के डिजाइन तैयार किए गए हैं। डिजाइन आईडब्ल्यूएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

केंद्र सरकार, विश्व बैंक की तकनीकी सहायता और निवेश सहायता के साथ 5369.18 करोड़ रुपये की लागत से एनडब्ल्यू-1 (वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग) पर जल परिवहन की क्षमता बढ़ाने काम चल रहा है।
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विशेष रूप से डिजाइन किए गए जहाज कम गहराई वाले क्षेत्रों में कम लागत पर अधिक भार ढो सकेंगे। जहाज पर्यावरण के अनुकूल भी होंगे। नई डिजाइन से प्रत्येक जहाज के निर्माण में 30 से 50 लाख रुपये तक की बचत होगी। 
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जर्मनी में किया गया डिजाइन के मॉडलों का परीक्षण

शुष्क एवं तरल मालवाहक, रो-रो जहाज, कार वाहक, कंटेनर वाहक, एलएनजी वाहक, कर्षण नौका बेड़ा के लिए नया डिजाइन जर्मनी की डीएसटी कंपनी ने बनाया है। डिजाइन के मॉडलों का परीक्षण जर्मनी में किया गया।

डीएसटी से अनुबंध के बाद विश्व बैंक के स्कोपिंग मिशन में पहली बार गंगा नदी की यात्रा की। तब उन्होंने राइन, डेन्यूबए, मिसिसिपी और सेंट लॉरेंस सीवेज जैसे सामान्य व निरंतर विकसित हो रहे जलमार्गों के विपरीत यहां विशिष्ट चुनौतियों का निरीक्षण किया।

पांच डेक वाले कारवाहक जहाज दो मीटर की गहराई में भी तैरने में सक्षम होंगे। इनमें लगभग 350 कार ले जाने में सक्षम होगी। तीन मीटर गहराई में 2500 टन की क्षमता वाले थोक मालवाहकों के डिजाइन भी शामिल हैं। केवल एक जहाज के संचालन से सड़क से लगभग 150 ट्रक अथवा पूरी तरह से भरे हुए एक रेल के भार को कम किया जा सकेगा।
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