सिकरौरा नरसंहार कांड के आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह को सोमवार को अदालत में पेश नहीं किया जा सका। इस मामले में बृजेश को नाबालिग घोषित करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला जज प्रथम पीके शर्मा की अदालत ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है।
29 जुलाई को इस मामले पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी। सिकरौरा नरसंहार मामले में अभी नाबालिग का पेच फंसा होने के कारण ट्रायल शुरू नही हो सका है। बृजेश सिंह का कहना है कि सिकरौरा नरसंहार कांड के दौरान वर्ष 1986 में वो नाबालिग थे।
वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता अमरेंद्र विक्रम सिंह की दलील है कि घटना के समय बृजेश बालिग थे। बृजेश के आर्म्स लाइसेंस और पासपोर्ट से घटना के समय उनका बालिग होना पाया गया है। लंबे समय से विचाराधीन इस मुद्दे पर अब कोर्ट ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है।