सैदपुर से दूसरी बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक सुभाष पासी को पार्टी की अंतरकलह का शिकार होना पड़ा। भाजपा में शामिल हुए विधायक के नजदीकी लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत चुनाव के समय से पार्टी नेतृत्व ने उन्हें किनारे करना शुरू कर दिया था। इसके साथ उनके स्थान पर दूसरे व्यक्ति को विकल्प में तैयार करने लगे थे।
सूत्रों की माने तो सैदपुर क्षेत्र से सपा को पहचान दिलाने वाले और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के एक करीबी के पुत्र पूर्व एमएलसी विजय यादव से बड़ी खटास उनके लिए घातक बनी और उन्हें समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने के लिए विवश होना पड़ा। इधर उनके भाजपा में शामिल होने के बाद सैदपुर सीट को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। सपा अपनी इस क्षति की भरपाई के लिए ऐसे नेता की तलाश में जुटी हुई है, जिससे भाजपा के टिकट से लड़ने वाले उम्मीदवार को करारी शिकस्त दे सके।