दुधवा नेशनल पार्क की टीम एक विशेष वैन से हाथी को ले गई।
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चार महीने बाद भी हाथी का मतवालापन खत्म नहीं हुआ तो दुधवा नेशनल पार्क ने उसे ले जाने से इंकार कर दिया। आशंका थी कि हाथी मिट्ठू दुधवा नेशनल पार्क में उत्पात मचा सकता है। फिर वन विभाग ने मथुरा स्थित एक रेस्क्यू सेंटर में संपर्क किया। वह हाथी को ले जाने को तैयार था पर वन विभाग की प्रार्थना को सीजीएम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
हाथी के मालिक ने हाइकोर्ट में भी अपील की है पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई। अमर उजाला ने सात जून के अंक में ‘जंजीर में जकड़ा बेजुबान, कोई नहीं दे रहा ध्यान’ शीर्षक से प्रकाशित की थी। जिसके बाद पशु प्रेमी वाराणसी पुलिस कमीश्नर ए सतीश गणेश ने इस संदर्भ में दुधवा नेशनल पार्क के अधीक्षक से हाथी को दुधवा ले जाने की बात की।
दुधवा के अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि जल्द ही हाथी को राम नगर से ले जाया जाएगा। रविवार को दुधवा नेशनल पार्क से डॉक्टरों की टीम वाराणसी आई। आराम करने के बाद शाम को टीम वन्य जीव विभाग रामनगर आई। हाथी को एक विशेष वाहन में लाद कर ले गई।
मिट्ठू हाथी दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया
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चंदौली के जिला वन अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि हाथी को दुधवा नेशनल पार्क ले जानी की बात काफी पहले से चल रही थी। पिछले साल भी टीम आई थी पर मतवालेपन की वजह से वह नहीं जा सका। मई के अंत में दुधवा नेशनल पार्क से फोन आया था कि हाथी को वहां ले जाया जाएगा। रविवार की सुबह दुधवा पार्क की टीम वाराणसी आई। पर मुझे दोपहर में यह सूचना मिली की हाथी को आज ले जाना है। फिर मैंने जरूरी कागजात तैयार कराए फिर देर शाम हाथी को टीम एक विशेष वाहन से ले गई। बताया गया कि वहां उसे छह महीने तक आइसोलेशन में रखा जाएगा।
डेढ़ वर्ष बाद बेड़ियों से आजाद हुआ वाराणसी का मिट्ठू हाथी
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काशी वन्य प्रभाग के रामनगर कार्यालय परिसर में कैद हाथी मिट्ठू को लखीमपुर खीरी स्थित नेशनल पार्क ले जाने के लिए सोमवार को छह सदस्यीय टीम आई थी। दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक दयाशंकर के नेतृत्व में चार प्रशिक्षित महावत सानू, इरशाद, माहताब और रईश के साथ एलीफेंट केयर सेंटर के पशु चिकित्सक राहुल भटनागर भी आए थे।
मिट्टू के साथ काशी वन प्रभाग के महावत और डेढ़ सालों से यहां हाथी की देखभाल करने वाले आसिफ और चारा कटर टिंकू राय भी दुधवा नेशनल पार्क गए हैं। वहां ये छह महीने तक हाथी के साथ रहेंगे। हाथी मिट्ठू को लखीमपुर खीरी के सोनारीपुर रेंज के गुलरा वन चौकी में रखा जाना है।