सीरिया के आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े 14 संदिग्धों की गिरफ्तारी ने एनआईए सहित अन्य शीष सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा कर रख दी है। ऐसे में आईएस का नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए विदेश जाकर लापता हुए देश के संदिग्ध लोगों की नए सिरे से तफ्तीश की जाएगी। इसके लिए इंटरपोल की भी मदद ली जाएगी।
साथ ही, तुर्की, सऊदी अरब सहित अन्य खाड़ी देश जाने वालों के बारे में उनके घरवालोें की मदद से लगातार तस्दीक कर उनकी गतिविधियों की निगरानी के निर्देश जारी हुए हैं। तय किया गया है कि प्रत्येेक जिले की स्थानीय अभिसूचना इकाई से समन्वय बनाकर केंद्रीय एजेंसियां अपने स्तर पर विदेश जाकर गायब हुए देश के लोगों का ब्योरा जुटाएंगी। ऐसे लोगों के घर वालों से संपर्क करने के साथ ही अन्य माध्यमों से उनकी सकुशल वतन वापसी का प्रयास किया जाएगा।
बांग्लादेश और नेपाल का रास्ता पाकिस्तान और खाड़ी देशों की ओर जाने के लिए अमूमन संदिग्ध लोग इस्तेमाल करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इनमें से कुछ वैध पासपोर्ट और वीजा धारक होते हैं। जबकि कई बिना पासपोर्ट और वीजा के ही अवैध तरीके से जाते हैं। इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो वापस लौटे ही नहीं और उनके बारे में किसी को जानकारी भी नहीं।
सुरक्षा एजेंसियाें के अनुसार ऐसे लोग आईएस का निशाना आसानी से बन सकते हैं। इसके लिए अब सभी जिले से खुफिया तरीके इसकी पुष्टि कराई जाएगी कि वैध और अवैध तरीके से विदेश जाकर न लौटने वाले कौन लोग हैं। विदेश में वे कहां हैं और स्थिति क्या है।
पाकिस्तान और तुर्की जाकर हो गए थे गायब
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार बनारस सहित पूर्वांचल के कुछ अन्य जिलों के लोग सालों पहले पाकिस्तान और तुर्की के लिए निकले थे। इनमें से पाकिस्तान से 23 वापस नहीं लौटे और तुर्की से पांच लोग लौटकर नहीं आए। इनके बारे में खुफिया एजेंसियों को भी कोई सटीक जानकारी आज तक नहीं मिल सकी है। आशंका है कि इनमें से कुछ लोग नापाक मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश में जुट गए हैं।
आईएस के नेटवर्क विस्तार में आईएम की अहम भूमिका
रांची और आजमगढ़ मॉड्यूल्स के शिथिल पड़ने के बाद इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का दायरा सीमित हो गया। सूत्रों के मुताबिक आजमगढ़ के संजरपुर का निवासी और बटला हाउस कांड का आरोपी बड़ा साजिद आईएम की गतिविधियों का कर्ताधर्ता था। अपने साथ पांच अन्य फरार आतंकियों को लेकर जब वह पाकिस्तान पहुंचा तो उसे कोई खास मदद नहीं मिल सकी। इसके बाद उसका रुझान आईएस की ओर बढ़ा।