अधिवक्ता ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि अभियोजन का कथानक झूठ पर आधारित है। बचाव पक्ष ने पुलिस की विवेचना पर भी सवाल उठाए। दलील दी गई कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता और उसके कथित साथी के मोबाइल फोन का विवरण नहीं लिया गया, जबकि आरोपियों के मोबाइल की जांच की गई। बचाव पक्ष ने शिनाख्त प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोपों को निराधार बताया। बहस के दौरान दिल्ली के निर्भया कांड का भी कई बार जिक्र किया गया।
ये है मामला : अभियोजन के अनुसार, दो नवंबर 2023 की रात बीएचयू परिसर में मोटरसाइकिल सवार तीन आरोपियों ने आईआईटी की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने लंका थाने में तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान सुंदरपुर स्थित बृज एन्क्लेव कॉलोनी निवासी कुणाल पांडेय, बजरडीहा के जीवधिपुर निवासी आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल के नाम सामने आने पर उन्हें आरोपी बनाया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मनोज गुप्ता तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ता मौजूद रहे।