धिवक्ताओं ने बचाया तो बोली- पढ़ना चाहती हूं लेकिन कहीं से नहीं मिल रही मदद
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वाराणसी कचहरी परिसर में मंगलवार दोपहर एक किशोरी ने खुद पर केरोसिन उड़ेल कर आत्मदाह की कोशिश की। जैसे ही वह माचिस की तीली जलाने लगी, मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने उसे रोक लिया। उससे माचिस की डिबिया छीनकर फेंकी और पुलिस को सूचना दी।
फूलपुर क्षेत्र के काशीपुरा गांव की वंदना (18) ने जब ऐसा करने का कारण बताया तो लोग सोच में पड़ गए। वंदना ने कहा कि वह हाईस्कूल से आगे पढ़ना चाहती है लेकिन उसे कहीं से मदद नहीं मिल रही है।
घर की आर्थिक स्थिति खराब है। डीएम से मिलने आई थी लेकिन जब वे नहीं मिले तो हताश होकर आत्मघाती कदम उठाने के लिए वह मजबूर हुई। पुलिस ने वंदना को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
कैंट पुलिस को वंदना ने बताया कि अजगरा निवासी शिवकुमार उसके पिता थे। पिता की मौत के बाद मां विद्या देवी ने काशीपुरा निवासी श्यामधनी से शादी कर ली तो वह उनके साथ रहने लगी।
बताया कि बड़ी मुश्किल से उसने 2015 में हाईस्कूल की परीक्षा 73 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की। वह डॉक्टर बनना चाहती है। मगर, ठेला संचालक पिता छह बच्चों के कारण उसे पढ़ाने में असमर्थ हैं।
आगे की पढ़ाई की बात कहने पर पिता ने उसे दो महीने पहले फूलपुर क्षेत्र स्थित ननिहाल पहुंचा दिया। इस बीच उसने कई जगह कोशिश की कि उसे आर्थिक मदद मिल जाए और वह आगे की पढ़ाई करे लेकिन सफल नहीं हुई।
वंदना ने कहा कि वह एक बार और डीएम से मिलने आई थी लेकिन मुलाकात नहीं कर सकी। इस बार सोच कर आई थी कि यदि डीएम नहीं मिलेंगे तो वह आत्महत्या कर लेगी।
खुली कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल
आत्मदाह का प्रयास करने वाली वंदना
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इस संबंध में कैंट इंस्पेक्टर फरीद अहमद ने बताया कि जिला प्रोबेशन विभाग की मदद से आशा ज्योति केंद्र में वंदना की काउंसिलिंग कराई गई है। फिलहाल वंदना वहीं है। बुधवार को उसके मां-बाप को बुलाकर उन्हें सुपुर्द कर दिया जाएगा। साथ ही, वंदना की पढ़ाई के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर जो भी मदद हो सकेगी, की जाएगी।
वंदना की आत्मदाह की कोशिश ने कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। इसे लेकर अधिवक्ताओं में चर्चा रही कि ऐसे तो कोई कुछ भी लेकर कचहरी परिसर में घुस जाएगा और पुलिस देखती रह जाएगी। वर्ष 2007 में कचहरी परिसर में हुए सीरियल बम विस्फोट में 11 लोगोें की मौत हुई थी और 80 लोग घायल हुए थे।
तब से लेकर अब तक कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के दावे तो तमाम किए गए मगर पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके। कलेक्ट्रेट और कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए रोजाना भारी संख्या में पुलिस और पीएसी तैनात की जाती है।
मगर, कचहरी के सभी प्रवेश द्वारों पर लगे मेटल डिटेक्टर शोपीस बने हुए हैं और पुलिस भी बेफिक्र होकर ड्यूटी करती है। इसी वजह से कचहरी परिसर में कुछ भी लेकर घुस जाना कोई मुश्किल भरा काम नहीं है। यह तो संयोग ही था कि वंदना ने खुद पर केरोसिन उड़ेल कर जैसे ही माचिस की तीली जलाई तो समीप खड़े अधिवक्ताओं की उस पर नजर पड़ गई।