आईआईटी बीएचयू के बहुत से ऐसे छात्र हैं जो विदेशों में अपनी लाखों की नौकरी छोड़ न सिर्फ स्वदेश लौटे हैं बल्कि अपने शहर को सुधारने के लिए आगे आ रहे हैं। ये युवा स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को साकार करने में लगे हुए हैं। जल संरक्षण से लेकर ऊर्जा संरक्षण तक के लिए उन्होंने नई तकनीक ईजाद की है। अब वे अपनी तकनीक के आधार पर शहर की व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं।
बीएचयू से आईआईटी की डिग्री लेने वाले गौरव केडिया जर्मनी की नौकरी छोड़कर भारत लौटे हैं और अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर प्राकृतिक ऊर्जा पर काम कर रहे हैं। इसी तरह आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई करने के बाद किसी कंपनी में लाखों के पैकेज पर नौकरी करने के बजाय नवीन और रोहित ने शहर में जल संरक्षण पर काम करना शुरू किया है और उन्हें सफलता भी मिली है।
2004 बैच के आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे गौरव केडिया को कैंपस प्लेसमेंट के तहत जर्मनी में नौकरी मिली थी। वहां पर उन्होंने कुछ साल तक काम भी किया। बाद में वे भारत लौट आए और ऊर्जा व पर्यावरण के क्षेत्र में काम किया। मानव जनित ऊर्जा उनका केंद्र रहा।
परंपरागत स्रोतों से ऊर्जा पर काम करते हुए ही गौरव ने अहमदाबाद में गोबर बैंक की शुरुआत की और गोबर से गैस बनाकर उन्होंने घरों में सप्लाई देना शुरू किया। इसी तरह उन्होंने कूड़े का निस्तारण करने के लिए बायो बॉक्स का ईजाद किया है। एक हजार घर के कूड़े का इस बायो बॉक्स में न सिर्फ निस्तारण होगा बल्कि इससे बायो गैस भी बनाई जा सकती है। दिल्ली में इसका प्रयोग हो रहा है और अब इसे बनारस शहर में लगाए जाने के लिए उन्होंने आईआईटी बीएचयू के माध्यम से नगर निगम को प्रस्तावित किया है।
उधर, आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग के छात्र नवीन कुमार व रोहित मित्तल ने 2014 में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। कैंपस प्लेसमेंट भी हुआ लेकिन उन्होंने अपना खुद का स्टार्ट अप शुरू किया। पहले दिल्ली में काम किया लेकिन बाद में बनारस के लिए उन्होंने काम करने की ठानी और वापस यहां लौट आए। बनारस में पानी की समस्या को देखते हुए उन्होंने पहले पर इस पर काम करने की सोची।
लेकिन जब उन्होंने देखा कि यहां पानी की समस्या तो है ही दूषित पेयजल की भी है और लोग वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये वाटर प्यूरीफायर पानी के 30 प्रतिशत को पीने योग्य बनाते हैं, बाकी 70 प्रतिशत पानी बेकार हो जाता है। इसलिए इन दो छात्रों ने वाटर प्यूरीफायर की ऐसी तकनीक बनाई जिससे 70 प्रतिशत पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। इनका कहना है कि शहर को सुधारने के लिए पहले इन छोटी छोटी चीजों पर हमें ध्यान देना होगा। प्राकृतिक स्रोतों का हम जितना दोहन करें, उतना ही उसे लौटाएं भी।