वाराणसी। सुगम यातायात के लिए वाराणसी को मेट्रो को ट्रैक पर उतारने का प्रयास परवान नहीं चढ़ पा रहा है। मेट्रो परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए मंगलवार को शासन और स्थानीय प्रशासन के बीच लंबी चर्चा में आम सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में तय किया गया कि 27 अक्तूबर के बाद केंद्र सरकार की शहरी विकास मंत्रालय टीम के साथ बैठक कर इस परियोजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
शहर को जाम मुक्त करने के लिए वाराणसी में कई वर्ष से मेट्रो संचालन पर मंथन किया जा रहा है। इसके लिए राइट्स ने दो बार सर्वे कर कार्ययोजना भी सौंप दी है। मगर, पुराने शहर में संकरी गलियों और ज्यादा तोड़फोड़ की आशंका के चलते मेट्रो परियोजना पर किसी तरह की चूक प्रदेश सरकार नहीं चाहती है। यही कारण है कि मंगलवार को मेट्रो परियोजना को मूर्त रुप देने के लिए हुई वर्चुअल बैठक में लंबी चर्चा के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। ऐसे में अधिकारियों ने केंद्र सरकार की सलाह और मार्गदर्शन पर सहमति जताई है। 27 अक्तूबर के बाद भारत सरकार की सर्वे करने वाली संस्था राइट्स, एलएमआरसी समेत मेंट्रो संचालन में योगदान करने वाले 13 प्रमुख विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। पिछले दिनों राइट्स की ओर से किए गए सर्वे पर भी चर्चा होगी। यहां बता दें कि रेल इंडिया टेक्निकल और इकॉनमिक सर्विसेज (राइट्स) द्वारा तैयार वाराणसी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्लेटफार्म परियोजना पर करीब 12 हजार करोड़ खर्च आंका गया है। पहले बनाए गए प्लान के अनुसार बाबतपुर रोड स्थित भेल से लंका तक 13 किलोमीटर तक लाइट मेट्रो चलाने का प्रस्ताव है। लाइट मेट्रो के 13 स्टेशन होंगे।
मोबिलिटी प्लान में कनेक्ट होंगे मोड
विकास प्राधिकरण की ओर से तैयार योजना के बाद राइट्स ने मेट्रो के साथ रोपवे और वाटरवेज को कनेक्ट करने का भी प्लान सुझाया था। इसममें 13 किलोमीटर लंबी मेट्रो परियोजना के साथ 16 किलोमीटर लंबे रोप-वे से पुराने शहर को इंटरकनेक्ट करने की योजना है। इसी तरह शहर की सड़कें चौड़ी करके इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। खिड़किया घाट से अस्सी तक वॉटर वेज के तहत फेरी सर्विस शुरू करने भी प्लान है। इससे लोग कम समय और कम खर्च में एक से दूसरे हिस्से में पहुंच सकेंगे।
तलाशी जा रही है टायर मेट्रो की संभावना
मेट्रो और लाइट मेट्रो के साथ ही वाराणसी में टायर मेट्रो के संचालन की संभावना तलाशी जा रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक कम डिब्बों की टायर मेट्रो कम जगह में आसानी से मुड़ने के साथ ही संकरे शहरों के लिए मुफीद है। हालांकि इस पर केंद्र सरकार की टीम के साथ चर्चा के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।
मेट्रो परियोजना पर चर्चा के लिए शासन की टीम के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए चर्चा हुई है। मेट्रो परियोजना के हर पहलु पर अध्ययन किया जा रहा है और संजीदगी से इसकी संभावना देखी जा रही है। भारत सरकार के अधिकारियों के साथ 27 अक्तूबर के बाद इस पर चर्चा होगी।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त