सेवापुरी। रामेश्वर गोशाला के मधुवन परिसर में भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण के उद्देश्य से 28 दिवसीय लक्षचंडी महायज्ञ बुधवार से शुरू हो गया।
यज्ञ के पहले दिन दशाश्वमेध घाट से निकली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही। इस दौरान सिर पर कलश लिए महिलाएं राम धुन के साथ बढ़ती जा रही थीं। स्वामी प्रखर महाराज ने महायज्ञ में हिस्सा लेने के लिए आए 1500 आचार्यों को वरण कराया। उधर, गोशाला में दिन भर पूजन-अर्चन का दौर चलता रहा।
महायज्ञ के लिए गोशाला के पास 100 कुंड बनाए गए हैं जहां देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने की कामना से आहुतियां दी जाएंगी। पुरोहितों के वरण के बाद पं अशोक पांडेय ने तबले की धुन पर दुंदुभी बजाई।
यहां उन्होंने सीता राम का धुन निकाला तो श्रोताओं ने ताली बजाकर उनका पूरा साथ दिया। इसके बाद कथक नृत्यांगना डॉ. ममता टंडन, अवंतिका गुप्ता ने रविशंकर मिश्रा के साथ गणेश वंदना, शिव स्तुति कर भगवान भोलेनाथ का गुणगान किया। उधर, दशाश्वमेध घाट पर प्रखर महाराज ने श्रद्धालुओं को भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए एकजुट होकर कार्य करते रहने का संकल्प दिलाया।
घाट से जल भरने के बाद सिर पर कलश लेकर महिलाएं आगे बढ़ती जा रही थी। शोभायात्रा के यज्ञ स्थल पर पहुंचने के बाद वैदिन मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। उधर, सुरक्षा की दृष्टि से यज्ञ स्थल पर पुलिस एवं पीएसी की तैनाती की गई है।