मुहर्रम की सातवीं तारीख को करबला के तेरह साल के शहीद इमाम हुसैन के भतीजे और इमाम हसन के बेटे मो. कासिम की याद में मेहंदी के चार जुलूस निकले। रविवार को रात में बड़ी मेहंदी का ऐतिहासिक जुलूस अजाखाना मस्जिद चौहट्टा लाल खां से पूरी अकीदमत व एहतेराम के साथ उठा। मुहम्मद इस्लाम एंड पार्टी ने शहनाई पर कर्बला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
चौहट्टा लाल खां से कटरा दाराशिकोह तक औरतों, मर्दों, बच्चाें का सैलाब नजर आ रहा था। जुलूस के साथ डॉक्टर नफीस हाशिम, शामिन रिजवी, शमशाद मिर्जा, शकील मिर्जा, मुहम्मद हुसैन राजू, परवेज हसन, हसन रजा, फाजिल रिजवी, सालिम रिजवी, कैसर हुसैन आदि मौजूद रहे। छोटी मेहंदी का जुलूस सरफजले अली मरहूम पूर्व राज्यपाल असम व नागालैंड के गुलजार महल स्थित इमामबाड़े से रात नौ बजे उठा। अंजुमन चिरागे अली एवं अंजुमन आबिदिया ने नौहा रव्वानी व मातम किया।
दूसरा जुलूस जस्टिस सर फजले अली के निवास से उठाया गया। देर रात 11 बजे चौहट्टा लाल खां के इमामबाड़े से जुलूस उठाया गया। तीनों जुलूस अंजुमन आबिदिया की देखरेख में उठाए गए। चौथा जुलूस दोषीपुरा में अंजुमन कारवाने करबला द्वारा उठाया गया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर ने बताया कि शहरभर के सभी शिया घरों में और इमाम चौकों पर रात 12 बजे जनाबे कातिम की याद में मेंहदी की फातहा दिलाई गई, मन्नतें मांगी गईं।
उध्ार, मुहर्रम के चांद की सातवीं तारीख को अलम सद्दा का जुलूस कई मुहल्लों से उठा। हरपालपुर, अलावल, रहीमपुर, धन्नीपुर, धमरिया से अलम सद्दा का जुलूस लोहता चौराहे पर आया। वहां से हरपालपुर के सूफी शहीद के मजार पर पहुंचा। जहां सद्दा को ठंडा किया गया।