Varanasi News : वाराणसी में संतो की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संतों ने भगवा धारण कर अनाचार को बढ़ावा देने वाले बहरूपियों से समाज को बचाने पर मंथन किया। कुंभ से पहले होने वाली इस बैठक में छद्मधारी ऐसे लोग जो संत होने का दावा करते हैं उनके बहिष्कार का प्रस्ताव रखा गया।
संत समाज धर्मांतरण को रोकने के साथ ही सामाजिक समरसता के लिए देश भर में जनजागरण अभियान चलाएगा। संत समाज गांव-गांव जाकर हिंदू समाज को मत, पंथ और संप्रदाय में विभाजित होने से रोकने के लिए जागरूक करेंगे। इसके साथ ही महाकुंभ से पहले हिंदी भाषी क्षेत्रों के संत हिंदू समाज को एकजुट करेंगे।
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सोमवार को यह निर्णय केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की दो दिवसीय बैठक के दूसरे दिन लिया गया। कैवल्यज्ञान मंदिर सिगरा में आयोजित बैठक में देशभर से आए संतों ने भाग लिया। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संरक्षक दिनेश ने कहा कि हिंदू समाज के भीतर एकता बनाए रखने के लिए संतों का नेतृत्व आवश्यक है।
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सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू समाज में संस्कारों की कमी के कारण परिवार टूट रहे हैं। बाबा विश्वनाथ को समरसता का प्रतीक मानते हुए कहा कि उनकी श्रद्धा देश और दुनिया के सभी श्रद्धालुओं में है। हमें भाषा, प्रांत, जाति, मत, पंथ और संप्रदाय के आधार पर बांटने की साजिशों के खिलाफ जागरूक होना होगा।
हिंदू समाज में धर्मांतरण के जरिए उसे कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं और संत समाज अब तय कर चुका है कि गांव-गांव में गोष्ठियां और सत्संग आयोजित कर हिंदू समाज को जागरूक किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे अखिलेश्वरानंद महाराज ने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना और सामाजिक परंपराओं के निर्वहन में हमारे संस्कार महत्वपूर्ण हैं।