सतयुग में भगीरथ की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटा में धारण कर पृथ्वी पर उतारने का मार्ग प्रशस्त किया था। अब प्रदेश सरकार के प्रयत्न से गंगा काशी में बाबा विश्वनाथ से मिलेंगी। विश्वनाथ मंदिर के अधिग्रहण के 33 वर्ष बाद सरकार ने गंगा को बाबा से मिलाने की परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। पर्यटन मंत्रालय से इस पर शीर्ष स्तर पर मंत्रणा हो चुकी है। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद गंगा को बाबा से मिलाने की योजना की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार इस योजना का खाका खींचते हुए वास्तुविदों ने डिजाइन भी तैयार कर ली है। न्यास इस परियोजना का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजेगा, ताकि काशी के धार्मिक पर्यटन को विश्व फलक पर चमकाया जा सके।
विश्वनाथ मंदिर से महज 150 मीटर दूर से बहने वाली उत्तरवाहिनी गंगा की धारा को पाइप लाइन के जरिए मंदिर परिसर में उतारा जाएगा। इसके लिए सरस्वती फाटक से ललिता घाट के बीच के कुछ भवनों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि धार्मिक पर्यटन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप दिया जा सके। ललिता घाट से लाहौरी टोला होते हुए सरस्वती फाटक मार्ग से गंगा को बाबा विश्वनाथ से मिलाने की योजना की डिजाइन भी बनाई गई है। इस परियोजना पर अनुमानित सौ करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
राज्य के पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना पर मंथन भी किया है। सीएम अखिलेश यादव को डिजाइन दिखाई जा चुकी है। इसके लिए मंदिर परिसर से ललिता घाट के बीच करीब 20 भवन खरीदन होंगे। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद इस योजना को लेकर बेहद उत्साहित है। अभी तक बाबा के दरबार में 300 लीटर गंगा जल प्रतिदिन सेवादार कलशों में भर कर लाते हैं और उसी जल से जलाभिषेक के साथ ही पावन जल को श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।