आर्य महिला पीजी कॉलेज के आईक्यूएसी इकाई और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में जन नाटकों की परंपरा पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य वक्ता उषा वैरागकर आठले ने कहा कि असमानता और दमन के खिलाफ आवाज उठाने में जन नाटक सशक्त माध्यम है।
विमर्श फोरम के जन नाटकों की परंपरा विषयक ऑनलाइन एकल व्याख्यान में उषा वैरागकर आठले ने कहा कि हिंदी नाटक अपनी अब तक कि लंबी यात्रा में अनेक मोड़ों से गुजर चुका है। उषा आठले ने जयशंकर प्रसाद के राष्ट्रीय जागरण के नाटकों से होते हुए 1941 में जन नाट्य संघ की स्थापना की चर्चा की। इस दौरान वंदना चौबे, प्रो. रचना दुबे, डॉ. शशिकांत दीक्षित, डॉ. भावना त्रिवेदी, डॉ. बृजबाला सिंह, डॉ. सुचिता त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।