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वाराणसी: सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद जवानों की शहादत को सलाम, सशस्त्र सलामी के बीच आखें हुईं नम

Wed, 23 Oct 2019 05:53 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बेटे गामिल बहादुर श्रेष्ठ को श्रद्धासुमन आर्पित करतीं मां - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के टंगधार में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले रायफल मैन गामिल कुमार श्रेष्ठा का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर 39 जीटीसी पहुंचा तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजनों, सैन्य अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गोरखा जवानों के बैंड ग्रुप की मातमी धुन के बाद 36 राउंड फायरिंग कर शहीद को सलामी दी गई। इसके बाद हरिश्चंद्र घाट पर शहीद के पार्थिव शरीर की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। 39 जीटीसी परिसर से हरिश्चंद्र घाट तक ‘शहीद गामिल अमर रहें’ के नारे गूंजते रहे।

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नेपाल के पाल्या रामपुर निवासी रुद्र प्रसाद श्रेष्ठा के छोटे पुत्र 21 वर्षीय गामिल जून 2018 में 39 जीटीसी से 42 हफ्ते का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद देश की सेवा के लिए तैनात हुए थे। शनिवार रात टंगधार में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में जीआर 222 बैच के जवान गामिल और हवलदार पदम बहादुर श्रेष्ठा शहीद हो गए थे।

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39 जीटीसी में शहीद गामिल का पार्थिव शरीर पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कमांडेंट बिग्रेडियर हुकुम सिंह बैंसला, कर्नल एके गुप्ता, कर्नल शेखर राय, कर्नल चंद्रशेखर सहित 39 जीटीसी के सभी अधिकारियों, जवानों, छावनी परिषद के सदस्य शहनवाज अली और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित किया।

कमांडेंट ब्रिगेडियर बैंसला ने शहीद के परिजनों को आश्वस्त किया कि उनकी मदद के लिए वह कभी पीछे नहीं हटेंगे। उधर, सेना के अधिकारियों ने बताया कि असम निवासी शहीद हवलदार पदम बहादुर श्रेष्ठा का पार्थिव शरीर परिजनों के अनुरोध पर नई दिल्ली से घर भेज दिया गया। इससे पहले शहीद गामिल का पार्थिव शरीर बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर एयरपोर्ट निदेशक आकाश दीप, सीआईएसफ  कमांडेंट सुब्रत झा, मेजर हरीश विजेंद्रन, एसपी ग्रामीण एमपी सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

नम आंखों से परिजनों ने कहा- गर्व है अपने लाल पर
तिरंगे में लिपटे शहीद गामिल के पिता रुद्र प्रसाद, मां सीता, बड़े भाई गणेश और भाभी करिश्मा के आंखों से आंसुओं की धार नहीं रुक नहीं रही थी। पिता ने कहा कि हमें अपने लाल की शहादत पर गर्व है। हमारे बेटे के जीवन की अवधि छोटी जरूर रही, लेकिन सर्वस्व न्योछावर कर उसने अपना नाम सुनहरे अक्षरों में इतिहास में दर्ज करा लिया।
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नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि और नेता
शहीद जवान के सम्मान में श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए जनप्रतिनिधि या नेता नहीं पहुंच सके। इसे लेकर मौजूद लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों का कहना था कि सोशल मीडिया पर देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जनप्रतिनिधियों न आना दुखद है। यहां राजनीति की बातें करने का उन्हें मौका नहीं मिलता तो भला वह क्यों आते।

रक्षा मंत्री ने कहा- देंगे मुंहतोड़ जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में नौसेना के कमांडरों की काफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश की भूमि पर कब्जा नहीं किया, ना ही किसी देश पर पहला हमला किया है। लेकिन हमारे देश के जाबांज जवानों के पास क्षमता है कि वे भारत पर बुरी नजर डालने वालों को मुहंतोड़ जवाब दे सकें। 
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