कमांडेंट ब्रिगेडियर बैंसला ने शहीद के परिजनों को आश्वस्त किया कि उनकी मदद के लिए वह कभी पीछे नहीं हटेंगे। उधर, सेना के अधिकारियों ने बताया कि असम निवासी शहीद हवलदार पदम बहादुर श्रेष्ठा का पार्थिव शरीर परिजनों के अनुरोध पर नई दिल्ली से घर भेज दिया गया। इससे पहले शहीद गामिल का पार्थिव शरीर बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर एयरपोर्ट निदेशक आकाश दीप, सीआईएसफ कमांडेंट सुब्रत झा, मेजर हरीश विजेंद्रन, एसपी ग्रामीण एमपी सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
नम आंखों से परिजनों ने कहा- गर्व है अपने लाल पर
तिरंगे में लिपटे शहीद गामिल के पिता रुद्र प्रसाद, मां सीता, बड़े भाई गणेश और भाभी करिश्मा के आंखों से आंसुओं की धार नहीं रुक नहीं रही थी। पिता ने कहा कि हमें अपने लाल की शहादत पर गर्व है। हमारे बेटे के जीवन की अवधि छोटी जरूर रही, लेकिन सर्वस्व न्योछावर कर उसने अपना नाम सुनहरे अक्षरों में इतिहास में दर्ज करा लिया।
नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि और नेता
शहीद जवान के सम्मान में श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए जनप्रतिनिधि या नेता नहीं पहुंच सके। इसे लेकर मौजूद लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों का कहना था कि सोशल मीडिया पर देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जनप्रतिनिधियों न आना दुखद है। यहां राजनीति की बातें करने का उन्हें मौका नहीं मिलता तो भला वह क्यों आते।
रक्षा मंत्री ने कहा- देंगे मुंहतोड़ जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में नौसेना के कमांडरों की काफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश की भूमि पर कब्जा नहीं किया, ना ही किसी देश पर पहला हमला किया है। लेकिन हमारे देश के जाबांज जवानों के पास क्षमता है कि वे भारत पर बुरी नजर डालने वालों को मुहंतोड़ जवाब दे सकें।