कुलविंदर सिंह (खरड़), कथावाचक किशन सिंह (अमृतसर), नरिंदर सिंह और रकम सिंह ने गुरुवाणी, कीर्तन और गुरमत विचारों से संगत को निहाल किया। उन्होंने अर्जन देव की शहादत को सबसे बड़ी शहादत बताया। संगत ने गुरुघर में हाजिरी लगाकर गुरु ग्रंथ साहिब पर मत्था टेका।
गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी रंजीत सिंह ने कहा कि गुरु अर्जन देव जालिमों के जुल्म के आगे नहीं झुके। वहीं, गुरुद्वारा परिसर में रक्तदान व निशुल्क नेत्र जांच शिविर लगा। लोगों ने अपने आंखों की जांच करवाई और युवाओं ने रक्तदान किया। पंगत में संगत की सेवा के लिए नन्हें-मुन्ने भी दिखे। बड़ों के साथ उनकी सेवा की ललक देखते बन रही थी। दिनभर संगत की आने-जाने का सिलसिला चला।
गुरुद्वारे से स्टेशन तक शर्बत पिलाकर प्यास बुझाई
गुरु अर्जन देव की याद में संगत ने शहर में जगह-जगह स्टाॅल लगाकर शर्बत पिलाया। लाजपत नगर कॉलोनी, शास्त्री नगर, साजन चौराहा, गांधी नगर सिगरा, गुरुद्वारा गुरुबाग, निचीबाग, भेलूपुर, गिरजाघर चौराहा, मालवीय मार्केट, नदेसर, कैंट रेलवे स्टेशन सहित 13 से ज्यादा स्थानों पर ठंडे और मीठे जल का वितरण हुआ।