श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर के सामने सभी यज्ञ होंगे। 24 अक्तूबर को प्रात : आठ बजे सामूहिक गणपति पूजा, दीक्षा समारोह, कंकण पहनना और गणपति व्रत के साथ यज्ञ का प्रारंभ होगा। इस अवसर पर प्राचीन ऋषियों एवं वैदिक संस्कृति पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रतिदिन सायं दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाएंगे। चक्रवर्ती विजय नावड़ ने बताया कि पूर्णाहुति के अंतिम दिन एक नवंबर को एक किलोग्राम सोने का नाग बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा।
नौ दिन में होंगे 22 से ज्यादा अनुष्ठान
नौ दिवसीय अनुष्ठान के दौरान श्रीमद्भाग्वतगीता पाठ, श्रीमनरायणीयम पाठ ,संपूर्ण रामायण हरि कथागान, नीराजन मंत्र, श्री वेंकटेश्वर व्रतम, नवग्रह पूजा, विशेष शनैश्चरार्चन,श्री आदित्य व्रत, सामूहिक अर्ध्य प्रदान,श्री केदारेश्वर व्रत, कर पार्थिव शिवलिंग की पूजा, हनुमद व्रतम, श्री महाविष्णु व्रत, तुलसी दलार्चन, शालिग्राम पूजा, श्री दत्तात्रेय व्रत गुरु पूजा, श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का पाठ, श्री ललिता व्रत, श्री ललित सहस्त्रनाम कुमकुमार्चन, श्री महालक्ष्मी स्तोत्र,सामूहिक श्री सत्यनारायण स्वामी व्रत, श्री विष्णु सहस्त्रनाम पारायण का कार्यक्रम होगा। प्रतिदिन के कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग दिन श्री सूर्यनारायण मूर्ति शांति कल्याणोत्सव, श्री शिव पार्वती कल्याणोत्सव, श्री सुब्रमण्यम शांति कल्याणोत्सव, श्री रुक्मणि वेणुगोपाल स्वामी शांति कल्याणोत्सव, श्री सीता रामचंद्र शांति कल्याणोत्सव का आयोजन किया गया है। प्रतिदिन श्रीचक्र नवावरण अर्चना की जाएगी।