नए बिजलीघरों की बढ़ती संख्या और भविष्य को लेकर बनती योजनाओं के बीच पब्लिक सेक्टर के सामने बिजली उत्पादन को लेकर चुनौती उत्पन्न हो गई है। निजी क्षेत्र की बिजली सस्ती होने के कारण केंद्रीय और राज्य सेक्टर की परियोजनाएं बिजली की खपत को लेकर अभी से जूझने लगी हैं।
बाजार न मिलने के कारण लगातार थर्मल बैकिंग करनी पड़ रही है। इससे कुछ परियोजनाओं के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा होने लगा है।
केंद्रीय पुल सेक्टर और राज्यों के लोड डिस्पैच सेंटर उन्हीं परियोजनाओं की बिजली आपूर्ति के लिए ले रहे हैं, जिनकी बिजली सबसे सस्ती पड़ रही है।
इसके चलते देश की अग्रणी कंपनी एनटीपीसी की कई परियोजनाओं को उत्पादन घटाना पड़ रहा है। सूबे में स्थित राज्य सेक्टर की परियोजनाओं में भी15 सौ से 25 सौ मेगावाट तक थर्मल बैकिंग कराई जा रही है। इसके चलते 210 मेगावाट की पनकी परियोजना में दो माह से उत्पादन शून्य है।
पारीक्षा की इकाइयों को बीच में दो दिन चलाने के बाद फिर से बंद कर दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि सिंगरौली में निजी क्षेत्र की सासन परियोजना की बिजली एनटीपीसी की परियोजनाओं से सस्ती पड़ रही हैं।
इसके चलते एनटीपीसी की मदर यूनिट सिंगरौली और देश के सबसे बड़े विंध्याचल बिजलीघर को लगातार पूर्ण क्षमता से उत्पादन शेड्यूल नहीं मिल पा रहा है। निजी क्षेत्र की ललितपुर और एनटीपीसी के ऊंचाहार की बिजली राज्य सेक्टर के पनकी, पारीक्षा से सस्ती होने के कारण इन दोनों परियोजनाओं में उत्पादन शून्य बना हुआ है।
खुले बाजार में भी बिजली दर की प्रतियोगिता से सबसे सस्ती बिजली देने वाले अनपरा बिजलीघर और निजी क्षेत्र की लैंको को थर्मल बैकिंग से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते कई परियोजनाओं के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगा है।