72 साल के हो चुके समाजवादी नेता राधेश्याम सिंह बताते हैं कि जेल में तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थीं। एक साथी अशोक पांडेय को जाड़े की रात में पानी के कुंड में रहने को विवश किया गया था। अधिवक्ता प्रहलाद तिवारी बताते हैं कि उनके हाथ-पैर में बेड़ियां डालकर तन्हाई में रखा गया था। कल्याण सिंह और लालमुनि चौबे के विरोध के बाद कुछ राहत मिली। हालांकि, हम सभी राजनैतिक कैदी के तौर पर थे।
राजनैतिक बात करने की मनाही थी
राधेश्याम सिंह बताते हैं कि उनसे मिलने उनकी माता जेल में आई थीं। पूछा कि इंदिराजी क का हाल हौ तो बीच में मौजूद पुलिसकर्मी ने कहा घर परिवार की बात करें और दंड स्वरूप एक महीना घर वालों से मिलने पर पाबंदी लगा दी। हम लोगों ने तो रिहाई की उम्मीद ही छोड़ दी थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रहलाद तिवारी बताते हैं कि उन्हें पहले डिफेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट में बंद किया गया था। इसमें उन्हें छह महीने में बेल मिल गई। वे राजनैतिक रूप से जब पुन: सक्रिय हुए तो दोबारा मीसा में बंद कर दिया गया।
पुलिस ने घर को बना दिया था छावनी
राजनारायण के दाहिने हाथ कहे जाने वाले रविंद्र पुरी कॉलोनी निवासी अनिरुद्ध नारायण सिंह बताते हैं कि वे बीएचयू के उपाध्यक्ष रह चुके थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए उनके घर को छावनी बना दिया। घर से कुछ दूरी पर उन्हें जब इस बात का पता चला हुआ तो वह लौट गए। उनके चाचा जगरनाथ सिंह मजिस्ट्रेट थे। इसलिए पुलिस ने कुर्की नहीं की। भरत सिंह भी उनके घर छिपने पहुंचे मगर घर वालों ने उन्हें बताया कि बराबर दबिश दे रही है तो वे बगल के गांव सागरपुर चले गए।