150 किलोमीटर तक सफर, सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं निशाना
पुलिस की पूछताछ में सुरेंद्र ने बताया कि वह रोजाना सुबह अपने घर से तैयार होकर बाइक से निकलता है और लगभग 150 किलोमीटर तक चला जाता है। ठीक-ठाक गहने पहने हुए किसी वृद्धा को अकेले देखता है तो अपनी बाइक रोक देता है।
वृद्धा के पास जाकर उनसे ऐसे सम्मान के साथ अभिवादन करता है कि जैसे पुराना परिचित हो। फिर हालचाल लेकर वृद्धा को बातचीत में उलझाकर उनके बच्चों के बारे में जानकारी लेता है और किसी एक बेटे का दोस्त बताता है। इसके बाद घर तक छोड़ने की बात कहता है।
रास्ते में कहता है कि आपके बेटे ने आपके गहने की मरम्मत कराने के लिए कहा था। इसके बाद मोबाइल फोन से नंबर मिलाकर बात करता है कि वृद्धा को विश्वास हो जाए कि उनके बेटे से गहने की मरम्मत के संबंध में कह रहा है। इसके बाद वृद्धा से गहना लेकर उन्हें दुकान में चलने की बात कह कर बाइक खड़ा करने के नाम पर भाग जाता है।
कपड़े-जूते, मौज-मस्ती और लड़कियों पर खर्च
सुरेंद्र ने पुलिस को बताया कि उचक्कागिरी की कई घटनाओं में उसका नाम प्रकाश में ही नहीं आया है। अन्यथा की स्थिति में मुकदमों की संख्या और ज्यादा होती। बताया कि गहनों को बेचने से जो मिलता है वह उसे कपड़े और जूते खरीदने के साथ ही मौज-मस्ती और लड़कियों पर खर्च करता है। अब पुलिस सुरेंद्र के जमानतदारों का सत्यापन कराएगी। इसके साथ ही उससे गहने खरीदने वालों पर भी शिकंजा कसेगी।