हे संकट हरणी भवानी, हमरो हाजिरी स्वीकार करिहीं...की धुन जब मां कूष्मांडा के दरबार में गूंजी तो श्रद्धालु भी भक्ति की रसधार में बह चले। दिल्ली के सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने बनारस में मां कूष्मांडा के छह दिवसीय शृंगार महोत्सव की चौथी निशा में सोमवार को अपने संगीत की भावांजलि अर्पित की।
मनोज ने बाड़ी शेर पर सवार रुपवा मनवा मोहत बा...से शुरू किया भक्ति गीतों का सिलसिला तो दर्शक और श्रोता भी मंच के चारों तरफ जम गए। मंदिर परिसर में मनोज तिवारी को सुनने के लिए बीएचयू के छात्रों सहित आसपास के लोगों की भारी भीड़ रही।
भोजपुरी गायक ने मां की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि बना दे मईया कौनो काम के... के बाद शीतला घाट पर काशी में आया मनोज तिवारी..., विंध्याचल वाली मईया... के बाद जब कजरी कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घिर आई हो ननदी...सुनाई तो श्रोताओं का उल्लास चरम पर था। निमिया के डार मैया झूलेलू झूलनवा...की धुन सुनकर श्रोता भी मगन हो गए। एक घंटे से अधिक चले कार्यक्रम ने पूरी महफिल लूट ली।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत रूहानी सिस्टर्स के नाम से मशहूर जागृति प्रसन्ना और नीता पांडेय के भजन से हुई। उन्होंने तू माने या न माने मैहर वालिए की प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमा दिया। इसके पश्चात इस करम का करुं शुक्र कैसे अदा, इसके बाद लाज रख लैनि मां आज मेरी सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
इसके बाद दिल्ली से पधारी रिनी मुखर्जी ने मंच संभाला। उन्होंने या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रुपेण संस्थिता... से शुरुआत की और समापन आद्या शक्ति परमेश्वरी काली...से किया।
संगीत की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली से आए पीयूषा, कैलाश, अनुज ने मंच संभाला। उन्होंने कई भक्ति गीतों की मनोहारी प्रस्तुति की। इन्होंने अपना प्रसिद्ध भजन रात श्याम सपने में आए सुनाकर दर्शकों को झूमा दिया। इसके पूर्व मां कूष्मांडा का रुद्राक्ष शृंगार सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। पूरे मंदिर परिसर को विविध फूलों से सजाया गया था।