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बनारस सहित पूर्वांचल में 200 टन आम की घट गई खपत

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वाराणसी। बनारस सहित पूर्वांचल में आम की खपत पिछले साल की तुलना में इस साल बहुत कम है। रिटेल कारोबार प्रभावित होने से आम की बिक्री पर जबरदस्त असर पड़ा है। पहले रोजाना 200-50 टन आम की खपत होती थी, अब बनारस सहित पूर्वांचल में मौजूदा समय में सिर्फ 50 टन ही आम की खपत हो पा रही है। इसके पीछे कारण यही है कि बनारस सहित अन्य जिलों में दुकानों के अल्टरनेट खुलने और बाहरी चीजों से अधिक परहेज भी लोग कर रहे हैं। पिछले साल लंगड़ा और दशहरी का थोक भाव 35 से 40 रुपये था। इस साल लंगड़ा का थोक भाव 25 और दशहरी का 20 रुपये प्रति किलो है। फुटकर में 40 से 50 रुपये की बिक्री बाजार में हो रही है।
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पहड़िया मंडी से प्रतिदिन 200 से 250 टन माल प्रतिदिन निकलता था। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वांचल के अन्य जिलों में आम पहड़िया मंडी से ही आम जाता है। करीब 50 टन माल रोजाना बिहार जाता था। अब सिर्फ 10 टन ही माल जा रहा है।
पिछले साल की तुलना में आम का भाव कम है। वहीं बनारस सहित पूर्वांचल में 50 टन आम की खपत रोजाना की है। पहले यही 200 से 250 टन रोजाना हुआ करता था। रिटेल कारोबार पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।- किशन सोनकर, अध्यक्ष, वाराणसी प्रगतिशील सब्जी-फल व्यवसायी संघ
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फुटकर में आम की बिक्री कम हो रही है। दाएं-बाएं नियम के तहत दुकानें एक ही दिन खुल रही है। इसलिए आम की बिक्री कम हो गई है। पहले एक क्विंटल आम एक दिन में बिक जाता था, अब चार दिन में बिक रहा। --राजेन्द्र प्रसाद, फल विक्रेता, लंका
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