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रंगभरी एकादशी: उत्सव के दूसरे दिन गौरा को ससुराल के नियम समझाने के साथ गाए गए मंगल गीत 

Sun, 13 Mar 2022 01:17 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चला हो गौरा ऊंचे पहड़वा, तोहरा के भोला बोलउले बा... की धुन गौरा के मायके में तब्दील हो चुके महंत आवास पर गूंजते रहे। बाबा के गौने की रस्म उत्सव का उल्लास शनिवार को पूरी रौ में रहा। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ मां गौरा की विदाई कराने के लिए कैलाश से काशी आएंगे।

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शनिवार को टेढ़ी नीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर उत्सव का रंग और भी चटख हो गया। गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला में हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली ने मंगल गीत गाए। उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए।

मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो उठा। लोक संगीत के बीच-बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला। मंगल गीतों में तैयारियों पर भी चर्चा हुई। भोले बाबा के आगमन के लिए महंत आवास पर तैयारियां की जा रही हैं। ठंडई, मेवे और पकवान तैयार कराए जा रहे हैं।

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