इसमें राजन के पिता भी मानसिक रूप से अस्वस्थ है। दूसरे नंबर के चाचा हरिहर प्रसाद जायसवाल उर्फ पप्पू खरावन ग्राम सभा के पूर्व प्रधान रह चुके हैं। तीसरे नंबर के चाचा गणेश जायसवाल का ईट भट्टे का कारोबार है। राजन के दो पुत्र और एक पुत्री है। इसमें बड़ी बेटी आरुषि(9) और बेटा हर्षित पांच(5) साल का है।
नशे की लत में व्यक्ति कुछ भी कर सकता है
बीएचयू के मनोचिकित्सक प्रो. संजय गुप्ता ने बताया कि नशा की जब तलब आती है और पैसा नहीं मिलता है तो व्यक्ति यह नहीं देखता है कि घर के लोग और बाहर के लोग कैसे हैं। मजबूरी में नशे की लत वाला व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। इस घटना में भी यही देखने को मिला है। ऐसे में लोगों को नशे के विरोध में आवाज उठाना होगा। सामाजिक मुहिम चलेगी तो कुछ हद तक इस पर निजात मिल जाएगा। चाहे कोई भी वर्ग हो सबके परिवार को नष्ट करता है।
सामाजिक मूल्यों में क्षरण का द्योतक है घटना
एक तो संसाधनों की कमी तो दूसरी ओर मानसिकता इस तरह की घटनाओं में प्रमुख वजह मानी जाती है। यह गलतफहमी होती है कि पुरुष है तो उसकी बात मान ली जाती है। पुरुष का दर्जा महिलाओं से ऊंचा है। ऐसे में महिलाएं विरोध नहीं करती हैं। बड़ागांव की घटना में भी पत्नी ने विरोध किया तो उसको बुरा लग गया। कुंठा ग्रस्त होना, तनाव में रहने की वजह से ही उसने इस घटना को अंजाम दिया है। सामाजिक मूल्यों में क्षरण का द्योतक है। जागरूकता बहंत जरूरी है। -प्रो. श्वेता प्रसाद, समाजशास्त्री, बीएचयू