कुआं, बावली, तालाब व बाग-बगीचे लगाने की शुरुआत, प्रथम व्रतारंभ, व्रत उद्यापन, देव प्रतिष्ठा, वधू प्रवेश, भूमि, सोना व तुला दान, विशिष्ट यज्ञ, अष्ट का श्राद्ध उपाकर्म, वेदारंभ, वेदव्रत, गुरुदीक्षा, विवाह, उपनयन और चातुर्मासीय व्रतारंभ।
किए जाने वाले कार्य
प्राणघातक बीमारी की निवृत्ति के लिए रुद्र मंत्र जप, व्रतादि अनुष्ठान, कपिल षष्ठी व्रत, अनावृष्टि निवृत्ति के लिए पुरश्चरण, ग्रहण संंबंधी श्राद्ध, दान, जप, पुत्रोत्पत्ति के कर्म, गर्भाधान, पुंसवन, सीमांत संस्कार।
अधिमास में गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, मटर, सतुआ, शहतूत, ककड़ी, केला, घी, कटहल, आम, पीपल, जीरा, सोंठ, सुपारी, आंवला और सेंधा नमक का सेवन करें।
खाने में वर्जित चीजें
मांस, शहद, उड़द की दाल, चौलाई का साग, चावल का मांड़, लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, राई, नशीले पदार्थ, तिल का तेल और दूषित अन्न का त्याग करना चाहिए। इसके अलावा इस मास में अपने परिवार के अतिरिक्त अन्यत्र कुछ ना खाएं।
विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, अधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, विश्वसाक्षी, नारायण, मधुरिप, अनिरुद्ध, त्रिविक्रम, वासुदेव, जगद्योनि, अनंत, शेषशायी, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैयारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धारावास, दामोदर, अद्यादन और श्रीपति।