दीपावली से पहले गिट्टी, बालू और ईंट के दामों में आई गिरावट से घर बनाना सस्ता हो गया है। दो-तीन दिन से गिट्टी और बालू के दाम 30 से 35 फीसदी तक कम हो गए हैं। इससे निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के यहां रौनक लौटने लगी है।
आम लोग हों या रियल इस्टेट कारोबारी, इसे शुभ संकेत मान रहे हैं। हालांकि मांग के अनुरूप मंडियों में गिट्टी-बालू की उपलब्धता न होने की परेशानी है। मई-जून से गिट्टी-बालू के दाम में आए उछाल ने निर्माण कार्यों की रफ्तार सुस्त कर दी।
कीमतों में जबरदस्त उछाल के साथ ही गिट्टी-बालू की पर्याप्त उपलब्धता न होने की दोहरी मार निर्माण सेक्टर पर पड़ी। गिट्टी-बालू की पर्याप्त उपलब्धता न होने के पीछे एनजीटी की ओर से सोनभद्र सहित कुछ जिलों में पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान के मद्देनजर खनन पर रोक लगाए जाने से सफेद बालू का खनन भी रुका है।
दूसरे राज्यों से गिट्टी-बालू मंगाने के कारण दाम लगभग दोगुने तक पहुंच गए थे। घाटे के डर से सरकारी और निजी क्षेत्र के कई ठेकेदारों ने काम रोक दिया। जहां काम जारी रहे, वहां गति धीमी पड़ गई।
अब बाहर से आवक बढ़ने और प्रदेश में छोटी अवधि के ठेके शुरू होने के बाद गिट्टी-बालू के दाम में दो दिन में ही जबरदस्त गिरावट आई है।
रियल इस्टेट कारोबारी अनुज डिडवानिया और अनिल सिंह का कहना है कि निर्माण सामग्रियों की कीमतों में आई गिरावट यदि स्थायी तौर पर बनी रही तो दीपावली के बाद से निर्माण कार्य अपनी रफ्तार पकड़ लेंगे।