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यूपी: एक महायोजना ने बाजार को कृषि क्षेत्र में किया तब्दील, अवैध हो जाएंगे कई आशियाने!

Thu, 01 Aug 2019 11:56 AM IST
Sayali Maurya संदीप सौरभ सिंह, अमर उजाला, आजमगढ़
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महायोजना का नक्शा और छतवारा बाजार - फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़ में विकास प्राधिकरण में कुछ माह पहले महायोजना-2031 प्रारूप को अपनाया था। इस पर आपत्ति भी ली जा चुकी है। आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है। इस महायोजना में शामिल प्रस्ताव में कई झोल नजर आ रहे हैं। छतवारा जैसे वर्षों पुराने बाजार जिससे कई लोगों का जीवन जुड़ा है यहां की पूरी भूमि को कृषि क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। 

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यही हाल बैठोली बाइपास और अन्य मार्गों और बाजारों का है। महायोजना का ड्राफ्ट तैयार करने में जनकर मानकों की अनदेखी कई गई है। मौके की स्थलीय जानकारी नहीं ली गई है। जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर के नेतृत्व में उप समिति का गठन किया है। समिति से स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट सात अगस्त तक तलब की गई है। इसके बाद प्रारूप में संशोधन होगा।

जनवरी माह में शासन की ओर से महायोजना-2031 प्रारूप को मंजूरी दी गई थी। नई महायोजना में शहर को छह जोन में बांटा गया था। 45 फीसदी (1586 हेक्टेयर) आवासीय, 6.34 फीसदी (544 हेक्टेयर) को व्यावसायिक और 18 फीसदी क्षेत्र को वनीकरण, हरित पट्टी और पार्क एवं क्रीड़ा स्थल दिखाया गया था।
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नये बस अड्डे और ट्रांसपोर्टनगर का भी प्रस्ताव था। नई महायोजना लागू से प्राधिकरण की सीमा फैजाबाद रोड पर महाराजपुर तक, निजामाबाद रोड पर भदुली तक, जौनपुर रोड पर चक खैरुल्लाह, वाराणसी रोड पर शाह कुंवरपुर और गाजीपुर रोड पर बयासी तक हो जाएगी। मऊ रोज पर बैठोली, बिलरियागंज रोड पर कीरतपुर और गोरखपुर रोड पर उकरौड़ा तक विस्तार हो रहा है। 

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खास बात ये है कि प्रारूर में ऐसे बाजारों और मार्गों को कृषि क्षेत्र में दिखा दिया गया है जो वर्षों पहले से आबाद हैं। सड़क से एकदम किनारे से कृषि क्षेत्र दिखाया गया है। यहां के बाजारों से हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। इसमें सिधारी से छतवारा, बेलइसा से छतवारा, बैठोली बाइपास आदि मार्ग प्रमुख हैं। छतवारा बाजार के साथ ही इन मागों पर कई छोटे-छोटे बाजार है, जहां दुकानें आदि आबाद है।

ऐसे में यदि इसे कृषि क्षेत्र घोषित किया जाता है तो ये वर्षों पहले बने ये निर्माण अवैध घोषित हो जाएंगे। प्राधिकरण के पास भी इन्हें वैध करने का कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। इसे आवासीय या अन्य क्षेत्र में रखने से प्राधिकरण की ओर से कंपाउंड जमा करा इनके नक्शे पास किए जा सकते हैं। इससे प्राधिकरण आय में भी वृद्धि होगी।

एडीए के एई डीबी राम ने कहा कि नई महायोजना प्रारूप में कुछ पुराने बाजारों और मार्गों के किनारों को भी कृषि क्षेत्र में प्रस्तावित किया गया है। इससे नुकसान होगा। डीएम ने इसमें सुधार के लिए उप समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट के अनुसार संशोधन संभव है। 
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प्राइवेट विद्यालय बने कमर्शियल, विरोध शुरू

नई महायोजना प्रारूप में शहर के कई प्रतिष्ठित सरकारी विद्यालयों को कमर्शियल श्रेणी में रख दिया गया है। विद्याल संचालकों ने ये कहते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है कि शासनादेश के अनुसार उन्हें छूट है। प्रकरण कमिश्नर के साथ ही डीएम के पहुंचा तो उन्होंने इस गलती को स्वीकार किया। कहा कि इसे दुरुस्त कराया जाएगा।

डीएम के समक्ष भी उठा मुद्दा, बनी समिति :
पिछले दिनों हुई प्राधिकरण की बैठक में डीएम एनपी सिंह के समक्ष भी मुद्दा उटा। उन्होंने इसे गंभीर मानते हुए एसडीएम सदर के नेतृत्व में कमेटी का गठन कर दिया। कमेटी प्रारूप में शामिल क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सात अगस्त कतक डीएम को देगी। रिपोर्ट के आधार पर महायोजना में आई आत्तियों का निस्तारण किया जाएगा और प्रारूप में संशोधन प्रस्तावित किया जाएगा।
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