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MGKVP: काशी विद्यापीठ में शुरू होंगे लैंग्वेज कोर्स, शोध को मिलेगा बढ़ावा; आईक्यूएसी की बैठक में हुआ फैसला

Thu, 03 Apr 2025 01:47 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Mahatma Gandhi Kashi Vidyapeeth: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में  लैंग्वेज कोर्स शुरू होंगे। इससे शोध को बढ़ावा मिलेगा। आईक्यूएसी की बैठक में ये फैसला हुआ। वहीं विश्वविद्यालय आंतरिक गुणवत्ता पर विशेष जोर देगा।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पढ़ने जाते छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल यानी आईक्यूएसी की बैठक में बुधवार को कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसमें विश्वविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ावा देने के और कई लैंग्वेज कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी है। साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से आंतरिक गुणवत्ता को भी बनाए रखने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी की अध्यक्षता में हुई त्रैमासिक बैठक में कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। कुलपति ने आइक्यूएसी द्वारा किए गए कामों की रिपोर्ट तैयार करने के साथ ही साथ सीएएस (कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम) प्रमोशन से संबंधित स्क्रीनिंग के कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने की बात कही। 

प्रो. एएन राय ने कहा कि आईक्यूएसी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता को सुनिश्चित करना है। इसके लिए नैक एवं एनआईआरएफ द्वारा दिए जाने वाले भारांक को देखते हुए कार्ययोजना को तैयार करना होगा। 

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बैठक में सत्र 2026-27 के लिए एकेडमिक ऑडिट कराने और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन स्कीम से संबंधित समुचित कार्ययोजना बनाने, 2025- 26 से आइक्यूएसी कैलेंडर को विश्वविद्यालय वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्णय हुआ। अतिथियों का स्वागत आइक्यूएसी निदेशक प्रो. नंदिनी सिंह, संचालन सदस्य डॉ. किरन सिंह, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंबरीश राय ने किया। इस दौरान डॉ. शिप्राधर, नीरज पारिख, प्रो. सविता भारद्वाज मौजूद रहे।

लैंग्वेज लैब को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने का आह्वान
प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर की शैक्षणिक एवं गैर शैक्षिक निकायों के साथ एमओयू हस्ताक्षर करने पर ध्यान देना होगा। साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों को उनके विषय से संबंधित 10 इनोवेटिव शोध क्षेत्रों को चिह्नित कर उस विषय पर कार्य करने की जरूरत है। विश्वविद्यालय द्वारा अपने लैंग्वेज लैब को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ते हुए नए भाषाई पाठ्यक्रमों को भी शुरू करने का प्रयास करना होगा।
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